अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 524

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, अपने प्रस्ताव पर बोलने से पहले, मेरे विचार में यह वांछनीय होगा किख्...,

श्री बी. दास (उड़ीसाः सामान्य)ः प्रत्येक मामले में रुकावट डाली जाती है। प्रत्येक व्यक्ति व्यवस्था का प्रश्न उठा रहा है। श्री नजीरुद्दीन अहमद ने छः महीने पहले व्यवस्था का प्रश्न उठाया था।

श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः वह व्यवस्था का प्रश्न अलग था। माननीय सदस्य को कुछ धैर्य रखना चाहिए।

माननीय उपाध्यक्षः मैं केवल यही कह सकता हूँ कि सदस्य को सोच-विचार कर व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहिए। वे इस बात पर भी विचार करें कि यदि उनका प्रश्न विधेयक से संबंधित नहीं हुआ तो, उन्हें सदन की आलोचना का पात्र बनना पड़ेगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा प्रश्न व्यर्थ समय गँवाने वाला नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः कोई भी सदस्य व्यवस्था का प्रश्न उठा सकता है। कोई सदस्य कितने भी व्यवस्था के प्रश्न उठा सकता है परन्तु प्रश्न औचित्यपूर्ण और उचित हो।

श्री नजीरुद्दीनः व्यवस्था के प्रश्न पर आपत्ति करना व्यर्थ समय गँवाना है। मेरा व्यवस्था का प्रश्न यह हैः माननीय विधि मंत्री इस प्रस्ताव पर पहले ही बोल चुके हैं। उन्होंने प्रस्ताव का पहला भाग समाप्त कर लिया था और उसके बाद अनुवर्ती चरण प्रारम्भ हुए। उन्हें चर्चा के अन्त में उत्तर देने का अधिकार है। अब प्रस्ताव रखा गया है कि विधेयक पर विचार किया जाए और इस बारे में 31 अगस्त, 1948 को भाषण किया जा चुका है। हमारे पास संशोधन की मुद्दागत सूची है। इस स्तर पर माननीय मंत्री जी प्रस्ताव पर दूसरा भाषण नहीं दे सकते।

माननीय उपाध्यक्षः मैंने 31 अगस्त, 1948 की कार्यवाही में इस प्रकार प्राप्त हैःµ

फ्माननीय विधि मंत्री डॉ. बी.आर. अम्बेडकरय्ः महोदय मैं प्रस्ताव रखता हूँःµ

फ्कि हिंदू कानून की कुछ धाराओं में संशोधन करने और उन्हें संहिताबद्ध करने, जैसा कि प्रवर समिति ने रिपोर्ट दी है, वाले विधेयक पर विचार किया जाए।य्

श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः महोदय, मेरा व्यवस्था का एक प्रश्न है।

माननीय उपाध्यक्षः मैं पहले मंत्री महोदय की बात सुनूंगा, उसके बाद आप अपना प्रश्न उठा सकते हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कार्य सूची में दिए गए सरकार के अन्य अत्यन्त