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अधिकार रहेगा। विधवा अगर हिंदू धर्म छोड़ देती है, तो उसे भी पुत्र को गोद देने का अधिकार नहीं होगा, जोकि अन्यथा यह अधिकार से होता।
प्रवर समिति ने दूसरा परिवर्तन गोद लेने के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न तरीकों के बारे में किया है। सदन इस बात को जानता है कि अब तक दत्तक ग्रहण के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जाते रहे हैं। दत्तकग्रहण का मुख्य तरीका, जो स्मृति द्वारा मान्यता प्राप्त है, दत्तकग्रहण का दत्तक तरीका कहलाता है। इसके अतिरिक्त, भारत के विभिन्न भागों में दत्तक ग्रहण के विभिन्न तरीके प्रचलन में हैं, जैसे कि गोधा दत्तकग्रहण, कृत्रिम दत्तक ग्रहण, द्वथामुश्यायना दत्तक ग्रहण। प्रवर समिति ने महसूस किया कि वे कानून को संहिताबद्ध करने जा रहे हैं, इसलिए यह वांछनीय होगा कि रिवाजों के आधार पर दत्तकग्रहण करने की प्रथा को समाप्त किया जाए, क्योंकि यदि रिवाजों की अनुमति दी जाती है, तो इस संहिता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा और एक दिन यह संहिता रद्द हो जाएगी। इसलि प्रवर समिति ने निर्णय किया कि यदि कोई इस संहिता के अन्तर्गत दत्तक-ग्रहण करना चाहता है, तो किसी को भी, इस संहिता के उपबंधों को छोड़कर, दत्तकग्रहण करने की अनुमति नहीं होगी और केवल दत्तक तरीका ही मान्य होगा।
इसके बाद, महोदय, दत्तक-पुत्र का गोद लिए जाने से जिन-जिन लोगों के नाम सम्पत्ति हैं, उन्हें उस सम्पत्ति से वंचित करने के अधिकार का मामला है। इस सदन के प्रत्येक सदस्य हिंदू कानून के वर्तमान उपबंधों को जानता है कि गोद लिया गया पुत्रµचाहे जिस भी आयु में उसे गोद लिया गया होµचाहे पिता की मृत्यु के 40 वर्ष बाद उसे गोद लिया गया होµसमय का उसके अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उसके गोद लिए जाने से पूर्व विधवा द्वारा स्थानांतरित की गई सम्पत्ति को वह वापस लेने के लिए मुकदमा कर सकता है। इस मुद्दे पर कोई भी मुकदमा किया जा सकता है। वास्तव में यदि कोई इस बात की जांच करता है कि विभिन्न मुद्दों पर हिंदू कानून के अन्तर्गत हिंदुओं में मुकदमें होते हैं, तो मुझे विश्वास है कि इन मुकदमों में सबसे अधिक संख्या उन मुकदमों की होगी जो दत्तक पुत्र द्वारा सम्पत्ति से बेदखल किए जाने के लिए चल रहे हैं। अतः यह वांछनीय होगा कि इस मामले को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए। राव समिति ने दत्तक ग्रहण को दो श्रेणियां में बांटा हैµसंहिता लागू होने के बाद पिता की मृत्यु से तीन वर्ष पहले किए दत्तकग्रहण और इस संहिता के लागू होने के बाद किए गए दत्तकग्रहण। उन्होंने निर्धारित किया कि यदि कोई लड़का दत्तक ग्रहण करने वाले पिता की मृत्यु से तीन वर्ष पहले गोद लिया जाता है, तो उसे हिंदू संहिता के अंतर्गत दत्तक पुत्र वाले सभी मूल अधिकार होंगे। यदि पिता की मृत्यु के तीन वर्ष बाद उसे गोद लिया जाता है, तो उसे हस्तांतरण करने का कोई अधिकार नहीं होगा।