अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 529

514 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दूसरी चीज जो हिंदू कानून के अंतर्गत होती है, वह यह है कि दत्तक पुत्र विधवा मां को, जिसने उसे गोद लिया, पूरी तरह सम्पत्ति से वंचित कर देता है। इसके परिणामस्वरूप पूरी सम्पत्ति दत्तक पुत्र को स्थानांतरित हो जाती है जो कि कुछ मामलों में एक अजनबी होता है और इसके बावजूद कि वह दत्तकग्रहण करने वाले पिता के परिवार का सदस्य बन जाता है, उसका लगाव अपने वास्तविक परिवार के सदस्यों के साथ जारी रहता है। इसके परिणामस्वरूप, दत्तकग्रहण के बाद दत्तकग्रहण करने वाली मां को दत्तकग्रहण के परिणाम स्वरूप वह सुरक्षा मिलनी चाहिए, जो कि एक सगी मां को अपने पुत्र से मिलती है, परन्तु दत्तक पुत्र सम्पत्ति के साथ भाग जाता है और मां के पास केवल भरण-पोषण का अधिकार रह जाता है। हमने सोचा है कि महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से यह ठीक नहीं है और इसके बारे में कुछ परिवर्तन किए हैं। राव समिति ने जो विशिष्टता अपनाई थी उसे निकाल दिया गया है। यह व्यवस्था की गई है कि दत्तक पुत्र को पिता की मृत्यु की तारीख से नहीं बल्कि गोद लिये जाने की तारीख से उसे अधिकार मिलेंगे ताकि उसके दत्तकग्रहण से पूर्व सम्पत्ति के हस्तांतरण को वह चुनौती न दे सके।

दूसरी व्यवस्था यह की गई है कि दत्तक पुत्र को दत्तकग्रहण करने वाली मां को पूरी तरह सम्पत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं होगा। संशोधित विधेयक में कहा गया है कि विधवा की आधी संपत्ति ही दत्तक पुत्र को मिलेगी। बाकी आधी विधवा के अधिकार में रहेगी। परिणाम यह है कि समिति ने दत्तकग्रहण की अनुमति दी है, क्योंकि हिंदू समुदाय समझता है कि परिवार को जारी रखने के लिए यह आवश्यक है। परन्तु इसके साथ ही यह भी व्यवस्था की है कि दत्तक पुत्र मां को कहीं भिखारी न बना दे।

माननीय उपाध्यक्षः क्या देशमुख अधिनियम के अन्तर्गत भी यह है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं। जैसा मैंने कहा है, वह केवल भरण-पोषण ले सकती है।

माननीय उपाध्यक्षः उसे सम्पत्ति का आधा हिस्सा मिलता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जैसे ही दत्तकग्रहण होता है संपत्ति का अधिकार पुत्र के पास चला जाता है।

श्री प्रभुदयाल हिमतसिंहका (पश्चिम बंगालः सामान्य)ः 1937 के अधिनियम के अनुसार वह पुत्र के साथ सहभागी है।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः पुत्र बाद में आता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसा हो सकता है। अब मैं नावालिग और संरक्षक की बात पर आता हूँ। इस मामले में विधेयक के इस भाग में प्रवर समिति ने