भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 534

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फ्अब ड्राफट कोड की विषय-वस्तु पर आते हैं। जिन मुख्य प्रस्तावों पर उनमें विभिन्न प्रकार के मतभेद सामने आए, वे इस प्रकार हैंःµय्

(1) मिताक्षरा प्रान्तों में जन्म से अधिकार को और उत्तरजीविता के सिद्धांत को समाप्त करना और मिताक्षरा का प्रतिस्थापना दायभाग से करना।

(2) पुत्री को आधा हिस्सा देना।

(3) हिंदू महिला की सीमित सम्पत्ति को पूर्ण सम्पत्ति में बदलना।

(4) एकविवाह को कानूनी रूप प्रदान करना।

(5) विवाह-विच्छेद के लिए कुछ उपबंध शामिल करना।

माननीय सदस्य इस बात पर ध्यान देंगे कि राव समिति ने अपने द्वारा किए जा रहे काम को सार्वजनिक कर दिया था कि उन्होंने संहिता में क्या-क्या शामिल किया है और इस बारे में क्या विशिष्ट उपबंध किए गए है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि सदन द्वारा नियुक्त पहली संयुक्त समिति, राव समिति और सरकार द्वारा एक कार्यकारी आदेश निकालकर एकत्रित किए गए साक्ष्यों को जिसने भी पढ़ा होगा उसने देखा होगा कि इस सदन में या सदन के बाहर कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं होगा, जिसने संहिता के इस भाग पर ध्यान दिया है, जिसे यह भ्रम हो कि राव समिति ने सहभागिता को समाप्त करने का निर्णय लिया है या प्रस्ताव रखा है। अतः यह प्रवर समिति द्वारा खोजी गई कोई नई चीज नहीं है।

प्रवर समिति ने हिंदू संहिता को लागू करने के बारे में कुछ परिवर्तन किए हैं। राव समिति के विधेयक में यह कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में मरुमक्काटटायम और अलियासंतानम कानून लागू होते हैं, उनमें संहिता लागू नहीं होगी। परन्तु, प्रवर समिति ने यह व्यवस्था की है कि कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं होगा, जिस पर यह संहिता लागू नहीं होगी। अतः इस उपबंध को उन्होंने निकाल दिया है।

माननीय उपाध्यक्षः एकरूपता लाने के लिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे नहीं पता यह गलत हुआ है या ठीक, इस बारे में सदन को विचार करना है।

पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गव (अजमेरः मारवाड़)ः मैं जानना चाहता हूँ कि क्या माननीय अध्यक्ष इस विचार से असहमत हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं बाद मं असहमत होऊंगा। इस बारे में मैं

खुले दिमाग से काम लेता हूँ।

श्री वी.एच. कामथ (सी.पी. बराड़ः सामान्य)ः खाली दिमाग नहीं है।