520 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मुझे प्रत्येक प्रश्न पर आशा है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मेरे द्वारा किया गया भाषण सामान्य परिस्थितियों में ऐसे अवसर पर पर्याप्त और उचित होता। परन्तु, यह तथ्य छिपाना गलत है कि सदन के कुछ लोगों को, जिनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, विधेयक के कुछ भागों पर आपत्ति है। मैं यह भी छिपाना नहीं चाहता कि सदन के बाहर अनेक लोगों की इस विधेयक में दिलचस्पी है और उसके बारे में बहुत चिंतित हैं। महोदय, यदि आप अनुमति दें तो मैं विवादास्पद मुद्दों के बारे में समाचारों में प्रकाशित लोगों की कुछ सामान्य टिप्पणियों का उल्लेख करना चाहता हूँ, जोकि इस विधेयक के आरम्भ से ही आ रही है। मैं इस मामले को खंडवार और धारावार लूंगा। मैं विवादास्पद मुद्दों पर बोलूंगा। पहले मैं विवाह और विवाह-विच्छेद पर आता हूँ। इस मामले में तीन मुद्दों पर विवाद है। पहला विवाद है कि एक वैध विवाह के लिए जाति का बंधन समाप्त करना, दूसरा है एकल विवाह की व्यवस्था और तीसरा है विवाह-विच्छेद की अनुमति।
मै सबसे पहले जाति बंधन के मुद्दे को लेता हूँ। जहां तक इस विधेयक का संबंध है, इसमें और पुरानी व्यवस्था में एक प्रकार का समझौता किया गया है। विधेयक में कहा गया है कि यदि हिंदू समुदाय का कोई सदस्य पुरानी प्रथा को मानना चाहता है, जिसमें व्यवस्था है कि जब तक वर और वधु एक ही वर्ण, एक ही जाति या उपजाति के नहीं होंगे, विवाह वैध नहीं होगा। इस संहिता में ऐसा कुछ नहीं है, जो उसकी इच्छा पर प्रतिबंध लगाता हो या उसके धर्म के विरुद्ध हो। इसी प्रकार यदि एक सुधारवादी जो वर्ण में विश्वास नहीं रखता, अपने वर्ण, जाति या उपजाति के अलावा किसी लड़की से विवाह करना चाहता है, तो उसका विवाह कानूनी रूप से वैध होगा। जहां तक विवाह कानून का संबंध है, इसमें किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। व्यधिकास, रूढि़वादियों को इस बात की छूट है कि वे अपने धर्म के अनुसार चल सकते हैं। सुधारवादी, जो धर्म को नहीं मानते, जो अपनी आत्मा की बात मानते हैं उन्हें अपनी आत्मा के अनुसार चलने की अनुमति है।
श्री महावीर त्यागी (यू.पी.ः सामान्य)ः यदि उनकी आत्मा अपने धर्म से बाहर विवाह करने के लिए कहे, तो क्या उन्हें ऐसा करने की अनुमति है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उसके लिए दूसरा विधेयक है। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि मेरे मित्र त्यागी जी अविवाहित हैं। यदि वे अविवाहित हैं, तो मैं यह विधेयक जल्दी ही ले आऊंगा।
श्री महावीर त्यागीः मैं दूसरों के लिए रास्ता बनाना चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः परिणामस्वरूप, जहां इस विवाह कानून का संबंध है, हिंदू समाज का क्या होगा यदि नये और पुराने कानून में मुकाबला हो गया