522 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और कौटिल्य के अर्थशास्त्र जैसे पुराने शास्त्रों के उदारहण हैं। इसके अतिरिक्त, वैवाहिक संबंधों का जहां तक संबंध है, पूरे विश्व में एकल विवाह को मान्यता मिली है।
श्री देशबन्धु गुप्ता (दिल्ली)ः मुस्लिम कानून क्या कहता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जब मुस्लिम कानून पर चर्चा होगी तो उस समय इस पर प्रकाश डाला जायेगा।
जहां तक विवाह-विच्छेद का संबंध है, मैं सदन को बताना चाहता हूँ कि यह भी कोई नई चीज नही है। सदन का प्रत्येक सदस्य जानता है कि ऐसे समुदायों हैं, जिन्हें ‘शूद्र’ कहते हैं, जिनमें विवाह-विच्छेद का रीति-रिवाज है, और इसलिए हम उन्हें शूद्र कहते हैं। किसी ने भी इस बात का मूल्यांकन नहीं किया होगा कि हिंदू समाज में कितने शूद्र हैं, परन्तु मुझे इसमें थोड़ा-सा भी संदेह नहीं है कि हिंदू जनसंख्या का 90 प्रतिशत शूद्र है। उन्नत जाति से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं। मैं सदस्यों से एक बात जानना चाहता हूँ कि जिस कानून को 90 प्रतिशत लोग मानते हैं, आप उसे मानेंगे या जिस कानून को 10 प्रतिशत लोग मानते हैं, उसे आप 90 प्रतिशत लोगों पर थोपेंगे? यह एक साधारण-सा प्रश्न है, जिसका उत्तर प्रत्येक सदस्य को देना चाहिए।
जहां तक हम उन्नत जातियों का संबंध है, जिस समय नारद स्मृति या पाराशर स्मृति लिखी गई, तो इन स्मृतियों में इस बात को मान्यता प्रदान की गई कि जब एक पति अपनी पत्नी को छोड़ देता है, तो वह उसे तलाक दे देती है, जब उसका पति मर जाता है, जब वह ‘परिव्रिज्य’ ले लेती है, तो वह दूसरा पति पाने की हकदार है। इस बात को दिखाने के लिए मैं बाद में शास्त्रों से कुछ उदाहरण पेश करूंगा। ( एक माननीय सदस्य ः फ्आपका शास्त्रय्)। हाँ, क्योंकि मैं अन्य जाति से संबंधित हूँ।
मैं यह दिखाने के लिए उदाहरण पेश करूंगा कि देश में क्या हुआ है। किसी प्रकार वैवाहित जीवन संबंध रीति-रिवाज दुर्भाग्यवश, अनजाने में शास्त्रों पर हावी हो गए। मैं सदन को यह बताना चाहता हूँ कि जहां तक विवाह या विवाह-विच्छेद कानून में यह सिद्धांत शामिल करने का प्रश्न है, जो कुछ किया गया है, वह उचित और शास्त्रों तथा पूरे विश्व के अनुभव के आधार पर किया गया है।
दत्तक-पुत्र के मामले में तीन मुद्दे विवादास्पद हैं। जहां तक दत्तकग्रहण का संबंध है, पुराने कानूने में उसी जाति से दत्तकग्रहण होना चाहिए, हमने ऐसा नहीं किया है। जो कानून हमने विवाह के लिए बनाया है, इस मामले में भी उसी का अनुसरण किया गया है। इस मामले में भी वही बात है, कि यदि एक ब्राह्मण एक ब्राह्मण लड़के को गोद लेना चाहता है या एक शूद्र अपने समुदाय के एक लड़के को गोद लेना चाहता है, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि एक ब्राह्मण किसी श्ूद्र को गोद लेना चाहता है,