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दूसर प्रश्न जिस पर विचार किया है, वह सहभागीदारी वाली सम्पत्ति को अधिकार में रखने का है कि क्या कोई सहभागी व्यक्तिगत रूप से सम्पत्ति को दस्तांतरित करने का अधिकार रखता है? तीसरी बात यह कि क्या किसी सहभागी को सहभागिता तोड़ने का अधिकार है? यदि सहभागीदारी सम्पत्ति की श्रेणी में आनेवाली सम्पत्ति कुल सम्पत्ति का एक छोटा-सा हिस्सा है, तो इस मामले में अलग प्रश्न उठता है। इसी प्रकार, यदि एक सहभागी के पास वर्तमान हिंदू कानून के अंतर्गत अपने हिस्से की सम्पत्ति की हस्तांतरित करने का अधिकार है, तो क्या सहभागीदारी वाली सम्पत्ति का निराकरण करने वाले विधेयक का अर्थ कुछ और होगा? इसी प्रकार, यदि वर्तमान हिंदू कानून के अन्तर्गत किसी सहभागी को सहभागिता को तोड़ने का अधिकार उत्तराधिकार में मिला हुआ है, तो मेरा कहना है कि यह प्रश्न महत्वहीन हो जाता है कि यह विधेयक सहभागिता को समाप्त करता है, जैसा कि सदन के अधिकांश सदस्य और सदन से बाहर लोग समझते हैं।
अब मैं पहला प्रश्न लेता हूँ। इस तथ्य के बावजूद कि एक व्यक्ति सहभागीदारी वाली सम्पत्ति का सदस्य है, वह सहभागीदारी वाली सम्पत्ति के अलावा कितनी सम्पत्ति रख सकता है। मेरे मित्र ने इस प्रश्न पर ध्यान दिया होगा, उसने देखा होगा कि वर्तमान हिंदू नियम के अन्तर्गत एक सहभागी अपनी अलग से कितनी भी सम्पत्ति रख सकता है जबकि वह एक सहभागी भी है। एक सहभागी दो तरह की सम्पत्ति रख सकता हैµएक तो वह सम्पत्ति जो सहभागीदारी वाली सम्पत्ति है और दूसरी वह सम्पत्ति जो सहभागीदारी वाली सम्पत्ति नहीं है और वह उसकी अपनी है तथा उत्तरजीविता के कानून के अन्तर्गत नहीं जा सकती।
मैं सदन को बताना चाहता हूँ कि एक सहभागी कितनी तथा किस प्रकार की सम्पत्ति रख सकता है। मैंने हिंदू कानून की पुस्तकों में देखा है कि एक व्यक्ति सहभागी होते हुए निम्नलिखित श्रेणियों की सम्पत्ति रख सकता है। पहली, एक तो वह सम्पत्ति जो उसे अपने पिता, दादा और पड़दादा के अलावा किसी हिंदू से उत्तराधिकार में मिली है। यदि एक हिंदू एक ऐसे व्यक्ति से सम्पत्ति प्राप्त करता है जो उसका मित्र, दादा या पड़दादा नहीं है, तो वह सम्पत्ति उसकी अपनी अलग सम्पत्ति है और सहभागीदारी वाली सम्पत्ति से उसका कोई संबंध नहीं होता। दूसरी वह सम्पत्ति है, जो उसे अपने नाना से उत्तराधिकार में मिली है। तीसरी पैतृक अचल सम्पत्ति है, जो उसके पिता ने उसे तोहफे के रूप में दी है। चौथी वह सम्पत्ति है, जो उसे सरकार ने अनुदान में दी है। ये सम्पत्ति उसकी अपनी सम्पत्ति होती है तथा इनका सहभागीदारी वाली सम्पत्ति से कोई सम्बन्ध नहीं होता। पांचवी वह पैतृक सम्पत्ति है, जो परिवार के अधिकार से निकल चुकी है, और उसने बिना परिवार की सहायता के स्वयं प्राप्त की है। यद्यपि वह सम्पत्ति सहभागीदारी वाली सम्पत्ति होती है, परन्तु वह उसकी अपनी बन जाती है। छठी वह सम्पत्ति है, जो