528 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अन्तर्गत संयुक्त परिवार का है। यह नहीं समझा जाना चाहिए कि बंगाल में मिताक्षरा कानून नहीं है, तो वहां संयुक्त परिवार ही नहीं है। वहां संयुक्त परिवार है। केवल अन्तर यही है कि संयुक्त परिवार के संयुक्त अधिकारियों के अधिकार अब एक सामान्य अधिकारी के अधिकार के रूप में होंगे। वर्तमान मिताक्षरा कानून और भविष्य के मिताक्षरा कानून में केवल यही अन्तर होगा।
अब मैं महिला सम्पत्ति के बारे में बोलना चाहता हूँ। मुझे पता नहीं सदन के कितने सदस्यों को इस विषय से जुटी जटिलताओं की जानकारी है। जहां तक मैंने इस विषय का अध्ययन किया है, हिंदू कानून में इस विषय से, महिला सम्पत्ति से जुड़ी जटिलताओं से कठिन कोई विषय नहीं है। ( एक माननीय सदस्यः जैसे कि महिला स्वयं जटिल है।) जैसे कि महिला स्वयं है। यदि आप यह प्रश्न करते हैं कि स्त्रीधन क्या है, उस प्रश्न का उत्तर देने से पहले आपको एक प्रश्न और पूछना होगा और इसका उत्तर मिलेगा सबसे पहले आप पूछिए क्या वह अविवाहित है या वह विवाहित है। क्योंकि स्त्रीधन क्या है वह महिला के इस दर्जे पर निर्भर करता है। कुछ स्त्रीधन वह सम्पत्ति होती है, जो उसे अविवाहित होते हुए मिलती है और कुछ ऐसी सम्पत्ति होती है जो उसे विवाह के बाद मिली सम्पत्ति भी स्त्रीधन नहीं होती। इसके परिणामस्वरूप, यदि आप प्रश्न पूछते हैं कि स्त्रीधन एक अविवाहित का है या विवाहित महिला का। क्यों एक अविवाहित स्त्री के स्त्रीधन की परंपरा एक विवाहित स्त्री के स्त्रीधन की परंपरा से बिल्कुल अलग है। जब आप विवाहित स्त्री की सम्पत्ति के बारे में उत्तराधिकार परंपरा की बात करते हैं, तो आपको अलग प्रश्न पूछना होगा कि क्या वह बंगाल स्कूल के अन्तर्गत होती है या वह मिताक्षरा स्कूल के अन्तर्गत आती है। यदि आप प्रश्न पूछते हैं कि क्या वह मिताक्षरा स्कूल के अन्तर्गत आती है, तो तब तक आपको इसका निश्चित उत्तर नहीं मिलेगा, जब तक आप इस बात का पता नहीं लगा लेते कि वह मिथिला स्कूल या बनारस स्कूल या अन्य किसी स्कूल के अन्तर्गत आती है। यह एक बहुत ही जटिल विषय है। सदस्यों से अनुरोध है कि वे दो बातें दिमाग में रखें। पहली बात तो यह है कि आमतौर पर स्त्री सम्पत्ति को दो श्रेणियों के अन्तर्गत रखा जा रहा है। पहली श्रेणी में स्त्रीधन आता है और दूसरी श्रेणी में विधवा की सम्पत्ति आती है। दूसरी सम्पत्ति वह है, जो उसे अपने परिवार के किसी पुरुष सदस्य से उत्तराधिकार में मिलती है और वर्तमान कानून के अन्तर्गत जो उसे केवल अपने जीवनकाल में ही मिलती है और उसके पश्चात् वह सम्पत्ति पुरुष के उत्तरभोगियों के पास चली जाती है।
इसलिए, जहां तक स्त्री की सम्पत्ति का संबंध है, दो विभिन्न प्रकार का उत्तराधिकार होता है और दो विभिन्न प्रकार की सम्पत्ति होती है। स्त्रीधन और विधवा की सम्पत्ति। स्त्रीधन के उत्तराधिकारी और पुरुष सदस्य से उसे उत्तराधिकार में मिली सम्पत्ति के उत्तराधिकारी अलग-अलग हैं। अतः हिंदू कानून की इस शाखा को संहिताबद्ध करने के लिए इस प्रश्न पर विचार करना पड़ेगा। क्या आप चाहते हैं कि इस समय प्रचलन