भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 544

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में जो दो प्रकार की सम्पत्ति है अर्थात् स्त्रीधन और विधवा की सम्पत्ति, इन्हें आप बनाए रखना चाहते हैं? दूसरे, क्या आप चाहते हैं कि उत्तराधिकार की दो परंपराएं रखी जाएंµएक स्त्रीधन के लिए उत्तराधिकार की परंपरा और दूसरी विधवा की सम्पत्ति के लिए उत्तराधिकार की परंपरा? इस कानून को संहिताबद्ध करने के लिए ये दो मुख्य प्रश्न हैं। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि यदि वर्तमान स्थिति को बनाए रखा जाता है, तो संहिताबद्ध करने का उद्देश्य ही असफल हो जाएगा। हमें यह निर्णय करना है कि एक स्त्री या तो पूर्ण सम्पत्ति की हकदार होगी या पूर्ण सम्पत्ति की हकदार नहीं होगी। हमें यह भी निर्णय करना है कि महिला के उत्तराधिकारियों की पंक्ति एक जैसी होगी या अलग-अलग होगी। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि जहां तक सम्पत्ति के अधिकारों का संबंध है, इसमें एकरूपता होनी चाहिए, और एकरूपता से ही महिला को पूरी सम्पत्ति का हकदार होने का पता चलेगा।

मैं जानता हूँ कि स्त्री को पूर्ण सम्पत्ति मिलने के मामले में हमेशा बहस होती है। यह कहा जाता है कि स्त्री अल्पबुद्धि होती है। यह कहा जाता है कि उस पर सभी प्रकार के लोग दबाव डालते हैं, जिसके परिणामस्वरूप, महिलाओं को चालाक पुरुषों के सभी प्रकार के दबाव में रखना बहुत खतरनाक होगा। वे सम्पत्ति को निबटाने के लिए उस पर हर तरह का दबाव डालते हैं, जो कि उनके लिए और उस परिवार के लिए हानिकारक होता है, जिससे उन्हें उत्तराधिकार में सम्पत्ति मिलती है। समिति ने बहुत ही साधारण-सा दृष्टिकोण अपनाया है। कुछ मामलों में या स्त्रीधन जैसी सम्पत्ति के कुछ मामलों में स्मृतियों में स्त्री को पूर्ण अधिकार देने की बात कही गई है। इस बात पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है कि स्त्रीधन पर स्त्री का पूर्ण अधिकार होता है। वह इसका जैसे चाहे इस्तेमाल कर सकती है। मेरा सदन से यह कहना है कि यदि स्त्री को अपने स्त्रीधन का अपनी इच्छा से इस्तेमाल करने का अधिकार है और मिताक्षरा कानून के अन्तर्गत इस पर कोई आपत्ति नहीं कर सकता, तो यह सिद्ध करना विपक्षी पार्टी का काम है कि सम्पत्ति का कुछ भाग, जो उसे उत्तराधिकार में मिला है, वह स्त्री की पूर्ण सम्पत्ति नहीं होनी चाहिए। जब स्त्री को सम्पत्ति के एक भाग का हस्तांतरित करने का अधिकार है, तो यह सिद्ध करना विपक्षी पार्टी का काम है कि सम्पत्ति के एक विशेष भाग को हस्तांतरित करने का उसे अधिकार नहीं है। समिति इस मामले का समाधान ढूंढ़ने में असफल रही है। मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ, कि जब स्त्री को सम्पत्ति के भाग को बेचने या हस्तांतरित करने का अधिकार है, तो उसे दूसरे भाग को भी बेचने या हस्तांतरित करने का अधिकार होना चाहिए। यही कारण है कि समिति ने यह नियम बनाया है कि स्त्री को पूर्ण सम्पत्ति का अधिकार होगा।

स्त्री की सम्पत्ति से संबंधित दूसरा प्रश्न पुत्री के हिस्से का है। मैं जानता हूँ क यह बहुत ही नाजुक और चिंता का विषय है। विश्व में, भारत में आज भी ऐसे रूढि़वादी