भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 548

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चार सदस्य थे परन्तु रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वालों में से दो हिंदू समुदाय के अदिवादी सदस्य नहीं है। मेरे मित्र श्री थारपुड़े जिन्हें मैं बहुत वर्षों से जानता हूँ, एक बहुत ही रूढि़वादी हैं... मैं जानता हूँख्...,

श्री एच.वी. कामथः राजनैतिक या सामाजिक दृष्टि से।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः राजनैतिक और सामाजिक रूप से भी। असल में मुझे यह बताने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अनेक ऐसे अवसर आए जबकि वे मुझसे अपनी असहमति प्रकट करने में कठिनाई महसूस कर रहे थे। वे एक रूढि़वादी हैं। मेरे मित्र श्री टी.आर. वेंकटरमण शास्त्र्सी एक उदार व्यक्ति हैं परन्त जैसा कि मैं जानता हूँ वे अतिवादी नहीं हैं। जब इन रूढि़वादी सदस्यों ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, तो हमें यह बात गारंटी से समझ लेनी चाहिए कि यह कोई क्रांतिकारी उपाय नहीं है। और न ही यह हिंदू समाज के लिए विघटनकारी उपाय है। जहां तक मेरा संबंध है, मैं एक रूढि़वादी व्यक्ति हूँ और मैं सदन को एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहता हूँ, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान में रखना चाहिए, विशेषकर सदन के रूढि़वादी सदस्यों को। महान राजनैतिक दार्शनिक एडमंड बुर्के, जिन्होंने अतिवाद और क्रांतिकारी परिवर्तनों के कारण फ्रांस की क्रांति के खिलाफ एक बहुत बड़ी पुस्तक लिखी है, अपने देश के रूढि़वादियों को एक महत्वपूर्ण सच बताना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि जो रूढि़वादी बने रहना चाहते हैं उन्हें सुधार के लिए तैयार रहना चाहिए ओर मैं भी इस सदन से कह रहा हूँ कि यदि आप हिंदू प्रणाली, हिंदू संस्कृति, हिंदू समाज को बनाए रखना चाहते हैं, तो जहां सुधार की जरूरत है वहां सुधार करने में न हिचकिचाएं। इस विधेयक से हिंदू प्रणाली के उन भागों में सुधार करने की कोशिश की गई, जो बेकार हो गए हैं।

श्री एच.वी. कामथः मैं एक बात याद दिलाना चाहता हूँ। माननीय डॉ. अम्बेडकर ने स्मृतियों से कुछ उदाहरण देने के लिए कहा था। क्या वे अपना वायदा पूरा करेंगे।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अंत में उदाहरण दूँगा। सौभाग्यवश, मेरे पास श्री द्वारका नाथ मित्र की लिखी फ्हिंदू महिलाओं के अधिकारय् नामक पुस्तक है। मैं इसमें से कुछ उदाहरण देना चाहता हूँ जिससे पता चलेगा कि वेदों में महिलाओं को जो अधिकार दिए गए हैं वे वाद में स्मृतियों में छीन लिए गए हैं और कुछ अन्य स्मृतियों ने ये अधिकार वापस करने के प्रयास किए हैं। मैं अपने भाषण के दौरान उदाहरण दूँगा।

श्री देशबंधु गुप्ताः क्या माननीय मंत्री महोदय प्रवर समिति के समक्ष रखे गए साक्ष्यों के बारे में सदन को कुछ बताएंगे।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जैसा कि हमारे सदस्य जानते हैं, हमारे दो संगठनों ने साक्ष्य देने के लिए कहा था। समिति ने उनका साक्ष्य लेने का निर्णय किया।