भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 549

534 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक संगठन ने आकर साक्ष्य दिया था और एक ने लिखकर भेजा था। वह संगठन था फ्धर्म निर्णय मण्डलय्। सामान्य तौर से विधेयक के उपबंधों से सहमत थे। एक व्यक्ति और था, जो इससे सहमत नहीं था।

माननीय उपाध्यक्षः प्रस्ताव प्रस्तुत किया गयाः

फ्कि हिंदू कानून की कुछ शाखाओं में संशोधन करने तथा उन्हें संहिताबद्ध करने के लिए प्रवर समिति द्वारा यथा प्रस्तुत विधेयक पर विचार किया जाए।य्

दो संशोधनों पर जोर नहीं दिया गया। अगला संशोधन क्या है?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः महोदय, मैं कोई संशोधन नहीं रखना चाहता।

माननीय उपाध्यक्षः जैसा कि मैंने विधेयक के माननीय प्रस्तावक के सुझावों का उत्तर देते हुए बताया है कि मैं प्रस्ताव रखते समय उन प्रस्तावों को बिना किसी भाषण के रखने की अनुमति दूंगा। सभी संगत और स्वीकृत संशोधनों को रखने के बाद उन पर तथा मूल प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

श्री देश बन्धु गुप्ताः महोदय मेरा एक व्यवस्था का प्रश्न है। क्या सदस्य को इस बात की अनुमति है कि वे ये कहें कि वे अपने संशोधन रखने की स्थिति में नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः जी हाँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः महोदय, निदेश दिया गया है।

एक माननीय सदस्यः किसने।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे पहले बिना भाषण के संशोधन रखने का निदेश दिया गया है। ( एक माननीय सदस्यः फ्किसने निदेश दिया है?य्)। मुझे माननीय उपाध्यक्ष महोदय ने निदेश दिया है। मुझे लगता है कि माननीय सदस्य बहुत बेचैन हैं।

श्री आर.के. सिधवा (सी.पी. और बराडः सामान्य)ः नहीं, हम नहीं। जारी रखिए।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे निदेश दिया गया है कि बिना भाषण के संशोधन रखें। मेरे माननीय मित्र विधि मंत्री के भाषण से मेरी जबान पहले ही बंद है।

श्री कृष्णास्वामी भारतीः आप पहले ही उल्लंघन कर रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः महिलाओं ने मेरे ऊपर गहरा प्रभाव छोड़ा है। और अब पंडित ठाकुर दास भार्गव ने कहा है कि वे संशोधन रखने की स्थिति में नहीं हैं।