भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 551

536 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अतः नियम के अन्तर्गत इस प्रकार के प्रस्ताव की अनुमति है। मैं जानना चाहता हूँ किस प्रकार इसे अस्वीकृत कर दिया जाए।

श्री बी. दासः मुझे नियम की जानकारी है। परन्तु सुबह जो व्यवस्था दी गई थी उसके अनुसार विलंबकारी प्रस्ताव की अनुमति नहीं है। अतः मैंने व्यवस्था का प्रश्न उठाया था।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः क्या मैं कुछ कह सकता हूँ? मैं समझता हूँ कि श्री दास ने बिल्कुल सही व्यवस्था का प्रश्न उठाया है, क्योंकिख्...,

एक माननीय सदस्यः नहीं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः जब उपाध्यक्ष महोदय ने अपनी व्यवस्था दे दी है तो उस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य एक साथ नहीं बोलेंगे। वे अपने स्थान पर

खड़े होंगे और एक-एक करके बोलेंगे। मुझे माननीय विधि मंत्री की बात सुनने दीजिए। प्रत्येक सदस्य को इस मुद्दे पर बोलने का अवसर दिया जायेगा, बशर्ते कि वह चर्चा में अपना उचित योगदान करें। किसी को भी बेचैन होने की जरूरत नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, जैसा कि आपको याद होगा कि कार्यसंचालन नियमों के अनुसार अनुज्ञेय प्रस्तावों की दो श्रेणियों हैंः एक तो वे प्रस्ताव हैं जिन्हें अध्यक्ष महोदय को आवश्यक रूप से सदन के सामने रखना होता है। और दूसरी श्रेणी उन प्रस्तावों की है, जिन पर अध्यक्ष महोदय सदन के समक्ष रखने से पहले इस बात पर स्वयं संतुष्ट हो जाएं कि ये उचित हैं। मैं एक स्थगन प्रस्ताव का हवाला देता हूँ। नियमों के अन्तर्गत कोई भी सदस्य स्थगन प्रस्ताव रख सकता है। परन्तु कुछ सदस्यों द्वारा स्थगन प्रस्ताव रखने से अध्यक्ष महोदय को यह अधिकार नहीं है कि वे उसे सदन के समक्ष रखें क्योंकि नियमों में यह निर्धारित है कि जब तक अध्यक्ष महोदय अनुज्ञेय समझें, प्रस्ताव नहीं रखा जा सकता, मैं और भी अनेक उदाहरण दे सकता हूँ। इस प्रकार के प्रस्ताव के बारे में अर्थात् विधेयक पर विचार के लिए स्थगन प्रस्ताव और आगे विचार जानने के लिए उसे परिचालित करने का प्रस्ताव, मैं समझता हूँ उस श्रेणी में आता है जिसमें सदन के समक्ष रखने से पहले अध्यक्ष महोदय की संतुष्टि जरूरी है। यह सदन की एक परंपरा है कि प्रवर समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद उस पर स्थगन प्रस्ताव या उस विधेयक को परिचालित करने का प्रस्ताव प्रथम दृष्टया विलंबकारी प्रस्ताव है। जब तक प्रस्तावक इसके लिए समुचित कारण नहीं बताता और अध्यक्ष महोदय संतुष्ट नहीं हो जाते कि कारण समुचित हैं, ऐसा प्रस्ताव अनुज्ञेय नहीं है। इन पुस्तकों में अनेक व्यवस्थाएं दी गई हैं। परन्तु मैं पुस्तक संख्या एक में व्यवस्था संख्या एक की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। इस प्रस्ताव के बारे में समुचित कारण नहीं बताए गए हैं।