540 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सकता है जब आप इसे स्वीकार करें। मेरा सुझाव है कि आप श्री नजीरुद्दीन अहमद से कारण पूछें और फिर निर्णय करें कि क्या यह विलंबकारी है और आप व्यवस्था दे सकते हैं कि यह नियमानुसार नहीं है, परन्तु आप कारणों से संतुष्ट हैं, तो आप इसे प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकते हैं।
श्री तजामुल हुसैनः खड़े हुए।
बाबू रामनारायण सिंहः महोदय, एक महत्वपूर्ण बात कहनी है।
माननीय उपाध्यक्षः व्यवस्था का प्रश्न उठाकर?
बाबू रामनारायण सिंहः जी हाँ, महोदय।
माननीय उपाध्यक्षः ठीक है।
श्री तजामुल हुसेन (बिहारः मुस्लिम)ः महोदय, आपकी नजर पहले मुझ पर पड़ी है। मेरा भी एक व्यवस्था का प्रश्न है।
माननीय उपाध्यक्षः इस व्यवस्था के प्रश्न को निबटाने के बाद श्री तजामुल हुसैन के व्यवस्था के प्रश्न पर विचार किया जाएगा।
बाबू रामनारायण सिंहः महोदय, आप पहले ही नियम उद्धृत कर चुके हैं। मैं समझता हूँ कि किसी नियम के विरुद्ध कोई भी अध्यक्ष व्यवस्था नहीं दे सकता। स्थिति यह है कि सदन में कोई विषय विचाराधीन हो सकता है और उस पर अलग-अलग मत हो सकते हैं। यह स्वाभाविक है। लोगों का एक वर्ग इसे वरदान समझता है और दूसरा इसे प्लेग की तरह खतरनाक एक अभिशाप समझ सकता है। जो लोग इसे अभिशाप समझते हैं। उन्हें प्रस्ताव में विलंब करने और यहां तक कि इसे समाप्त करवाने का अधिकार है। इस मामले में भी इस वर्ग को यह प्रस्ताव रखने का अधिकार है। और न्याय की मांग है कि उन्हें यह विशेषाधिकार और अधिकार है।
श्री तजामुल हुसैनः खड़े हुए।
माननीय उपाध्यक्षः एक और व्यवस्था का प्रश्न है, जिसे माननीय सदस्य उठाना चाहते हैं। इसके बाद इस पर विचार होगा।
मैं समझता हूँ कि श्री नजीरुद्दीन अहम ने स्वयं ही इतने सारे व्यवस्था के प्रश्न उठवाएं हैं क्योंकि उन्होंने आज सुबह एक व्यवस्था के प्रश्न से शुरूआत की थी। सभी कानूनी बारीकियों के अलावा हम श्री नजीरुद्दीन अहमद से पूछ सकते हैं कि उनका उद्देश्य क्या है और परिचालन के लिए रखे गए प्रस्ताव के बारे में कौन-से महत्वपूर्ण मुद्दे उनके दिमाग में हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं समझता हूँ कि यह प्रश्नख्...,