भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 556

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पंडित हृदय नाथ कुंजरुः श्री नजीरुद्दीन अहमद द्वारा उत्तर दिए जाने से पहले क्या मैं आपसे पूछ सकता हूँ कि क्या आप इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि विधेयक को पुनः परिचालित करने के लिए प्रस्ताव रखने का सदस्य का अधिकार अध्यक्षपीठ की इच्छा पर निर्भर करता है?

माननीय सदस्यः खड़े हुए।

माननीय उपाध्यक्षः कृपया शांत रहिए। सदस्यों को अध्यक्षपीठ का सम्मान करना चाहिए। जब मैं खड़ा होता हूँ, तो उन्हें बैठ जाना चाहिए। मैं समझता हूँ कि मैंने काफी कुछ सुन लिया है। क्या अध्यक्षपीठ कारण पूछने के लिए स्वतंत्र नहीं है? इसका मतलब यह नहीं है कि मैंने कोई निष्कर्ष निकाल लिया है। मैं निष्कर्ष निकालने को तैयारी कर रहा हूँ। मैंने श्री भारती के विचार सुने हैं। इस प्रश्न को छोड़कर कि क्या अध्यक्ष जी को नियमों के अन्तर्गत स्वीकृत या अस्वीकृत करने का अधिकार है, मैं जानना चाहता हूँ कि किन कारणों से इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए। यह जानने के बाद मैं अपनी व्यवस्था दूंगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा उत्तर दोहरा है। पहला प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कानून के बारे में है तथा दूसरा प्रस्ताव प्रस्तुत करने के कारणों के बारे में है। इस समय, अध्यक्षपीठ ने मुझे भाषण न देने के लिए कहा है। मैंने इस बहस से पूरी तरह बचने की कोशिश की है कि इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का क्या कारण है। मेरा अनुरोध है कि प्रस्ताव की कानूनी वैधता और अनुज्ञेता और सदन द्वारा इसे स्वीकार किए जाने के कारणों के बीच अन्तर होना चाहिए। इस समय मेरा कहना है कि मेरे द्वारा रखे गए प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए मुझे कुछ नहीं कहना है।

माननीय उपाध्यक्षः इस मुद्दे पर काफी बहस हो चुकी है। जहां तक श्री दास का कहना है कि यह विलंबकारी है, मैं समझता हूँ कि माननीय विधि मंत्री ने जिस प्रस्ताव का हवाला दिया है, वह बिल्कुल अलग है। उन्होंने अध्यक्षपीठ की व्यवस्था उद्धत की है और वाद-विवाद को स्थगित करने के बारे में व्यवस्था संख्या एक का उदाहरण दिया है। जब स्थगन प्रस्ताव, जिसके लिए कोई विशेष नियम निर्धारित नहीं किए गए हैं, को विलंबकारी मानना अध्यक्षपीठ के स्वविवेक पर निर्भर करता है और उसे इस बात के लि संतुष्ट होना चाहिए कि किन कारणों से वाद-विवाद का स्थगन जरूरी है। जहां तक परिचालन के लिए वर्तमान प्रस्ताव का संबंध है, इसके लिए नियम 52(2) में व्यवस्था है। माननीय विधि मंत्री ने इसे स्थगन प्रस्ताव के समान मान कर हवाला दिया है परन्तु स्थगन प्रस्तावों के लिए विशिष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं और इसके लिए अध्यक्ष को अधिकार दिया गया है कि वे इस बात का निर्णय करें कि क्या प्रथम दृष्टया प्रस्ताव नियमानुसार है। मैं नियम 36 उद्धत कर रहा हूँ। स्थगन प्रस्ताव रखने का