544 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री नजीरुद्दीन अहमदः इसमें महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं और मैं आपको दिखा दूँगा।
माननीय उपाध्यक्षः बैंचों पर आपस में कोई भाषण नहीं होना चाहिए। जहां तक महिला सदस्य द्वारा दिए गए तर्क का संबंध है, मैं इस प्रकार समझता हूँ। अध्यक्ष महोदय ने निश्चित रूप से यह कहा था कि प्रवर समिति ने जिस विधेयक पर विचार किया था वह उससे भिन्न नहीं हैं, जो उसे भेजा गया था। परन्तु विधेयक को पुनः उसके पास भेजने के अनेक कारण हैं। इसलिए, जब तक अन्य आधार पर कोई आपत्ति नहीं उठाई जाती...
श्रीमती रेणुका रेः फ्मूल विधेयकय् शब्द इसमें हैं।
माननीय उपाध्यक्षः मेल विधेयक दूसरे विधेयक जैसा ही है। इसलिए उन्होंने कहा है, फ्मूल विधेयकय्। हम फ्मूलय् शब्द को निकाल देंगे।
श्रीमती रेणुका रेः फ्मूलय् शब्द उसमें हैं। अतः हम इसे प्रस्ताव में से नहीं निकाल सकते।
माननीय उपाध्यक्षः अध्यक्ष महोदय ने व्यवस्था दी है कि प्रवर समिति से जो विधेयक आया है, वह मूल विधेयक है और इसलिए फ्मूलय् शब्द का प्रयोग करने में कोई हानि नहीं है। इस बात पर आपत्ति उठाई गई थी कि मूल विधेयक पर प्रवर समिति ने विचार नहीं किया। अध्यक्ष महोदय ने व्यवस्था दी कि यह मूल विधेयक था, जिस पर प्रवर समिति ने विचार किया। अतः माननीय सदस्य ने अपने संशोधन में कहा है कि मूल विधेयक को प्रवर समिति के पास पुनः भेजा जाए। महिला सदस्य द्वारा दिया गया तर्क उसके द्वारा स्वयं उठाई गई आपत्ति के खिलाफ है। मैं समझता हूँ कि प्रस्ताव में कोई गलत बात नहीं है।
श्री आर.के. सिधवाः प्रस्तावक की मंशा बिल्कुल अलग है। वह इसे मूल विधेयक नहीं समझते और इसलिए वे इसे उसी प्रवर समिति को पुनः भेजना चाहते हैं।
श्री एच.वी. कामथः यद्यपि, प्रस्तावक की मंशा स्पष्ट है। मैं समझता हूँ कि श्री नजीरुद्दीन अहमद संशोधन का प्रारूप तैयार करते समय कुछ आगे बढ़ गए। मेरा सुझाव है कि वे पूरे मामले पर पुनः विचार करें और इस प्रस्ताव को बाद में प्रस्तुत करें।
माननीय उपाध्यक्षः मैं नहीं समझता कि फ्मूलय् शब्द का प्रयोग करने से स्थिति प्रभावित होगी। दूसरी बात यह है कि अध्यक्ष महोदय ने व्यवस्था दी है कि यह वही मूल विधेयक है जो प्रवर समिति को भेजा गया था और यही विधेयक संशोधन के बाद वापस आया था। मैं इस पर आपत्ति स्वीकार नहीं कर सकता। इस मामले पर और अधिक समय बर्बाद करना ठीक नहीं है।