भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 560

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संशोधन संख्या 13 प्रस्तुत किया जाए।

पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः मेरा संशोधन भी मूलतः वही हैं, जो श्री नजीरुद्दीन अहमद ने रखा है। मैं इसके समर्थन में बोलूंगा और अपना प्रस्ताव नहीं रखूंगा।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य को अन्य प्रस्तावकों के बाद बारी मिलेगी।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं अपना अगला संशोधन तब ही रखूंगा, जब मेरा संशोधन संख्या 10 पारित हो जाएगा।

श्रीमती रेणुका रेः मेरा एक व्यवस्था का प्रश्न है। संशोधन संख्या 15 अध्यक्ष महोदय की व्यवस्था के खिलाफ है।

माननीय उपाध्यक्षः अध्यक्ष महोदय की व्यवस्था इस मुद्दे पर लागू नहीं होती। यह सदन प्रवर समिति द्वारा की गई पुनव्यवस्था से संतुष्ट नहीं होगा। अतः मूल प्रस्ताव फ्कि इसे प्रवर समिति को भेजा जाएय् रह सकता है। इस मामले में कोई व्यवस्था का प्रश्न नहीं हो सकता।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः महोदय, मैं प्रस्तुत करता हूँः

फ्कि विधेयक को प्रवर समिति के पास इन अनुदेशों के साथ भेजा जाए कि वह सदन को प्रस्तुत मूल विधेयक पर विचार करे और अलग अधिनियमन के लिए स्वतः पूर्ण अलग भागों और अध्यायों के मूल क्रम को पुनर्व्यवस्थित किया जाए।य्

माननीय उपाध्यक्षः मुझे संशोधन को अस्वीकृत करना पड़ेगा। क्योंकि भागों और अध्यायों को पुनर्व्यवस्थित करने पर कोई आपत्ति नहीं उठाई जा सकती। मैं इस संशोधन को रद्द करता हूँ।

श्री बी. दासः महोदय अलग संशोधन प्रस्तुत किए जाने से पहले, मैं जानना चाहता हूँ कि क्या एक सदस्य पांच संशोधन रख सकता है?

माननीय उपाध्यक्षः वैकल्पिक संशोधन की सूचना दी जा सकती है। माननीय सदस्य इस सदन के पुराने सदस्य हैं, उन्हें इस बात की जानकारी होनी चाहिए।

श्री नजीरुद्दीन अहमद के अगले संशोधन में केवल फ्31 दिसम्बर, 1949य् शब्द जोड़े गए हैं। मैं नहीं समझता कि उन्हें संशोधन संख्या 16 रखने की जरूरत है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः इसमें जिस प्रवर समिति का हलावा दिया गया है, वह अलग है।