हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 56

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और बच्चे भी न रहें तो कौन उत्तराधिकारी बनेगा? महिला के पिता और माता। ये लोग लोग उनके समान लाखों अन्य लोग हैं, जो अपनी पुत्री के घर का पानी भी नहीं छूना चाहते, उसकी सम्पत्ति ले लेंगे? ( श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः फ्क्योंय्?) आप यह नहीं समझ सकते, यह मेरी कठिनाई है, आप यह महसूस नहीं कर सकते। क्या मैं यह निवेदन करूं, श्रीमान, पिता जैसे ही अपनी पुत्री को दामाद को सौंपता है, पिता अपनी बेटी के घर कभी नहीं जाता। वह अपना भोजन उसके घर नही लेता और उसके घर जल भी ग्रहण नहीं करता। इसलिए कि पवित्रता बनी रहे। किसी पुत्री को विवाह में केवल किसी धारणा के लिए अथवा दूसरे भौतिक लाभ के लिए ऐसे केई लोग हैं जो उस गांव में नहीं जाते हैं जहां पुत्री का विवाह हुआ है। हमें इन तथ्यों को उसी प्रकार जानना चाहिए जैसे कि वे हैं। यह कहने का कोई अर्थ नहीं है कि वे जानते ही नहीं। यह संभव हो सकता है कि वे नहीं जानते हों। अब यह होगा कि एक ससुर महिला से उसकी वसीयत की सम्पत्ति प्राप्त करेगा। यह असहयनीय स्थिति होगी। मान लीजिए कि वह महिला, पति या बच्चे नहीं छोड़ती तथा उसके न तो पिता हैं और न ही माता, तब क्या होगा? यह जटिल स्थिति है। महिला को पिता से सम्पत्ति उत्तराधिकार में मिली है। पति, बच्चों, पिता अथवा माता की अनुपस्थिति में वह सम्पत्ति, महिला के पिता के पुत्र यानी भाई को नहीं मिलेगी। मुझे स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत करने दें सम्पत्ति ‘क’ के परिवार की है, परन्तु सम्पत्ति ‘क’ के परिवार को वहीं जाएगी। महिला के भाई समान रक्त और मांस के वास्तिक भाई हैं, परन्तु वह सम्पत्ति पति के परिवार की उस सूची के सैकड़ों को मिलेगी जो यहां दी गई है। महिला का देहान्त हो जाता है, उसके पति, बच्चे, पिता और माता नहीं हैं, ऐसे मामले में उसकी सम्पत्ति का उत्तराधिकार उसके भाई अथवा भाई के बेटे या अन्य लोगों का नहीं होगा, बल्कि सम्पत्ति का उत्तराधिकार पति के परिवार का होगा ऐसा क्यों है? क्योंकि आपकी प्रवर समिति ऐसी सक्षम नहीं हो पाई है कि वह उस धारणाओं से अलग नहीं हो पाए, जो काफी लम्बे समय से पूरे समुदाय को प्रभावित कर रही है। ( श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः वर्तमान में क्या स्थिति है?) हमारा उससे कोई संबंध नहीं है। आप वर्तमान स्थिति से पूर्णतया अवगत हैं। यह ‘स्त्रीधन’ हैः इस पर पुत्री का उत्तराधिकार नहीं होता, उसकी स्थिति भिन्न है। मैं निवेदन कर रहा था कि एक परिवार की सम्पत्ति महिला के भाई को उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं होती। परन्तु यह सम्पत्ति अन्य लोगों को मिल जाती है। यह ऐसी स्थिति है जिसके बारे में मैं समझ नहीं पाता। परन्तु, आपको यह महसूस करना चाहिए कि स्थिति ऐसी है। आप उसका उपचार कर सकते हैं और मेरी प्रार्थना है कि आप इसका उपचार करें। यह ऐसा प्रश्न है जिसके संबंध में आपको दुरुस्त सलाह दी जाएगी। यह उनमें से एक बिन्दु है जो मैं आपके विचारार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ। मैं यहीं पर उत्तराधिकार के प्रश्न को छोडूंगा ऐसी अन्य कई बातें भी हैं जिन्हें अब आपके विचारार्थ प्रस्तुत किए जा सकते।