550 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विवादग्रस्त धाराएं है और उन विवादग्रस्त विषयों पर उन्होंने पूरा प्रकाश भी डाला है। पहला विवादग्रस्त विषय है विवाह और तलाक। यदि हम विवाह और तलाक को लें तो मैं एक बात को तो स्वीकार करने को तैयार हूँ कि हमें अपने कानून में इस प्रकार का परिवर्तन करना चाहिये। जिससे जात-पात की समाप्ति हो जाय। और यदि कोई ब्राह्मण किसी शूद्र से विवाह करना चाहता है, या कोई शूद्र किसी ब्राह्मण से विवाह करना चाहता है तो उनको विवाह के सम्बन्ध में या ब्राह्मण और शूद्र छोड़ दीजिये, कोई हिंदू किसी मुसलमान से विवाह करना चाहता है, या कोई मुसलमान किसी हिंदू से विवाह करना चाहता है, किसी भी जाति के लोग यदि किसी अन्य जाति में विवाह करना चाहते हैं तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिये हमारे यहां जात-पात ने हमारे देश को नष्ट कर दिया है। इस देश और समाज के टुकड़े, छोटे से छोटे टुकड़े हो गये हैं। और आज विवाह के सम्बन्ध में उन टुकड़ों के सबब से जो दिक्कतें होती हैं वे हम सब जानते हैं। पुराने लोग भी जानते हैं और आज जब उन्हें इस प्रकार के विवाह करने पड़ते हैं। तो उनकी नाक भौंह सिकुड़ती है। वे कहते हैं कि हम अपने लड़कों की शादी अपनी इच्छा के विरुद्ध करते हैं या हमें अपनी लड़की की शादी अपनी इच्छा के खिलाफ करनी पड़ती है। तो इस आजादी के मैं बिल्कुल पक्ष में हूँ। मैं तलाक के भी पक्ष में हूँ। मैं कहना चाहता हूँ कि यद्यपि अब तक संसार में कोई ऐसी विवाह पद्धति नहीं निकली है जो सब आपत्तियों के निवारण करने की चीज मानी जाय, परन्तु इसेक साथ हमें यह भी देखना है कि यदि पति पत्नी एक दूसरे के साथ सुख से नहीं रह सकते तो उन्हें तलाक का अधिकार होना चाहिए। डॉ. अम्बेडकर ने यह कहा कि इस देश के नब्बे प्रतिशत लोगों में अब भी तलाक की प्रथा है। ये नब्बे प्रतिशत शूद्र कहलाते हैं, मैं तो शूद्रों और ब्राह्मणों में कोई फर्क नहीं मानता और उन्हें शूद्र कहना सबसे बड़ा जुल्म मानता हूँख्...,
माननीय श्री जगजीवन राम (श्रम मंत्री)ः क्या यह हिंदू धर्म की जड़ों को नहीं काट देगा?
सेठ गोविन्द दासः नब्बे प्रतिशत शूद्रों में तलाक है, उनमें भी मुझे ऐसा लगता है कि उनके जो रीति-रिवाज है उनको न मान कर यदि हमने इस विधेयक को पारित कर दिया तो नब्बे प्रतिशत लोगख्...,
श्री राज बहादुरः अध्यक्ष महोदय, क्या मैं माननीय सदस्य से प्रार्थना कर सकता हूँ कि तलाक के स्थान पर कोई हिंदी का शब्द प्रयोग करें?
सेठ गोविन्द दासः मैं समझता हूँ कि माननीय सदस्य हिंदी भाषा का अर्थ नहीं जानते। जितने शब्द हिंदी में ले लिये गये हैं वे हिंदी के ही हैं वह चाहे ‘तलाक’ हो चाहे और कुछ, फिर भी यदि वे तलाक के लिये शब्द सीखना चाहते हैं तो मैं कहना चाहता हूँ कि ऐसा शब्द विवाह-विच्छेद हो सकता है। हां, तो मैं यह कह रहा था कि