भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 566

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उन नब्बे प्रतिशत लोगों के रीति-रिवाज को हटा कर अगर यह कानून पारित किया गया तो इसका यह अर्थ होगा कि वे अपने रीति-रिवाज के मुताबिक तलाक नहीं दे सकेंगे और उसमें उन्हें बहुत अड़चनें होंगी। इसलिये अम्बेडकर साहब की जो इच्छा है कि लोगों को विवाह करने की पूरी आजादी हो, लोगों को तलाक देने की पूरी आजादी हो तो उसमें भी बड़ी भारी अड़चनें आ सकती हैं। औरतों और मर्दों को सबको मैं इस प्रकार की पूरी आजादी देने के पक्ष में हूँ।

अम्बेडकर साहब ने जो यह कहा कि हम जो दस प्रतिशत उच्च वर्ग के लोग कहे जाते हैं, ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य, वे नब्बे प्रतिशत लोगों पर कुछ चीजें लादना चाहते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि हम जो दस प्रतिशत पढ़े लिखे लोग हैं वे नब्बे प्रतिशत लोगों के ऊपर बहुत चीजें लादना चाहते हैं। लादते ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य नहीं हैं, लादते ये लोग हैं जो किसी प्रकार से एसेम्बली में आ गये हैं। मैं अपनी बहनों से भी कहना चाहता हूँ कि मैं इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं हूँ कि मेरी बहन दुर्गाबाई और रेणुका रे और यहां जो स्त्रियां हैं वे स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, या यहां जो बहनें दर्शक दीर्धा में आती हैं वे स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। मैं मानता हूँ कि जो यहां मौजूद नहीं हैं, जो दर्शक दीर्धा में नहीं आतीं। वे इस देश की स्त्रियों का अधिक प्रतिनिधित्व कर सकती हैं, वनिस्वत उनके जो यहां पर मौजूद हैं। हमें स्वीकार करना होगा कि जो आज यह बात कही जाती है कि कुछ उच्च वर्ण के कहे जाने वाले लोग निम्न वर्ण के कहे जाने वाले वर्णों पर अपनी राय लादते हैं, यह सही नहीं है। सही बात यह है कि दस प्रतिशत पढ़े-लिखे लोग नब्बे प्रतिशत पर अपनी राय लाद देना चाहते हैं, इस देश की जनता क्या चाहती है, इस बात को जाने बिना वे अपनी राय इस देश की जनता पर न लादें। मैं यह नहीं चाहता कि यहां पर इस प्रकार का कोई कानून पास हो जो जनता की इच्छा के खिलाफ हो।

श्रीमती रेणका रेः क्या 90 प्रतिशत यह जानती है, कि आप संविधान बना रहे हैं।

सेठ गोविन्द दासः हम जानते हैं कि लोग हमारे साथ हैं। यह कहना ठीक नहीं है, कि आपको ही इसकी चिंता है। इस संबंध में लोगों का आदेश लेकर आए हैं।

दूसरी बात उत्तराधिकार के सम्बन्ध में यहां पर कही गई हैं। यह कहा गया कि उत्तराधिकार के मामले में हमको बहुत से सुधार की आवश्यकता है। मानता हूँ कि स्त्रियों को कोई उत्तराधिकार न दिया जाय और वे सम्पत्ति वे ले सकें तो यह उनके प्रति बड़े से बडा अन्याय है। स्त्रियों को उत्तराधिकार का अधिकार होना चाहिए। अब स्त्रियों को उत्तराधिकार का अधिकार कहां तक होना चाहिये यह सवाल है। डॉ. अम्बेडकर ने मनु और याज्ञवल्क्य की स्मृतियों की बात यहां कही और यह कहा कि उन स्मृतियों में भी लड़कियों को चार आने तक उत्तराधिकार दिया गया है। मैं कहना चाहता हूँ कि