भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 567

552 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जहां तक उत्तराधिकार का सम्बन्ध है वहां तक यदि याज्ञवल्क्य और मनु की यह राय है तो भी मेरे मत से इसमें सुधार होना आवश्यक है। इस देश में या इस संसार में एक जमाना था जब मातृ-गृह थे पर आज के समाज में मातृ-गृह न रह कर पितृ-गृह हो गए हैं। जब तक देश में तथा संसार में मातृ गृह थे और विवाह के पश्चात् वर कन्या के यहां आकर रहता था। उस समय तक कन्या को पिता की सम्पत्ति में अधिकार होना ठीक बात थी। परन्तु अब जब पितृ-गृह हैं और कन्या पिता के यहां से श्वसुर के यहां जाती है उस समय पिता की सम्पत्ति में कन्या को अधिकार देना मेरी दृष्टि से उचित बात नहीं है। मेरी दृष्टि से बहू को श्वसुर की सम्पत्ति में अधिकार होना चाहिये। ज्योंही विवाह हो जाऐ त्यों ही बहू को सम्पत्ति में उतना ही अधिकार मिलना चाहिये, जितना लड़के को मिलता है। आज जो लड़के को पूरा अधिकार ही रहता है। यदि कोई स्त्री विधवा हो जाए तो उसे खाने और कपड़े का अधिकार ही रहता है। मैं इसके बिल्कुल खिलाफ हूँ। इसलिए मैं कहना चाहता हूँ कि स्त्रियों को अधिकार तो होना चाहिए सम्पत्ति पर, पर उनका अधिकार होना चाहिए श्वसुर के घर की सम्पत्ति पर, पिता के घर की सम्पत्ति पर नहीं।

श्री मोहन लाल गौतमः यदि श्वसुर न हो?

सेठ गोविन्द दासः तो पति के घर में।

श्री मोहन लाल गौतमः यदि पति न हो?

सेठ गोविन्द दासः तो लड़के के घर में।

श्री मोहन लाल गौतमः और अगर लड़का न हो?

श्री तजामुल हुसैनः यदि वह शादीशुदा नहीं है, तो क्या करेगी?

सेठ गोविन्द दासः यह अलग बात है। उनको कहीं न कहीं से मिल ही जाता है। यहां पर जो यह दृष्टान्त दिया गया है कि अगर 12 लड़के हों और तेरहवीं लड़की हो, तो यदि 12 लड़कों में पिता की सम्पत्ति का विभाजन करने का अधिकार है तो तेरहवीं लड़की को क्यों न हो। मैं कहना चाहता हूँ कि 12 लड़के अपने पिता के घर में रहते हैं। 12 लड़कों का जो विभाजन होता है यह उसी स्थान पर होता है।

श्री कृष्ण चंद्र शर्माः अगर लड़की भी पिता के घर रहना चाहे?

सेठ गोविन्द दासः चूंकि लड़की दूसरे के घर जाती है, इसलिए लड़की के लिए यह बात लागू नहीं हो सकती। एक बात सम्पत्ति के उत्तराधिकार में और हुई है और वह यह कि अब उत्तराधिकार का अधिकार वसीयतना में से होगा। जहां वसीयतनामे नहीं लिखे जायेंगे वहीं झगड़े होंगे। यह नहीं, पर जहां वसीयतनामें लिखे जायेंगे वहां भी झगड़े