भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 569

554 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अब्दुल कलाम आजादः और वे इसे छोड़ना भी नहीं चाहते।

सेठ गोविन्द दासः छोड़ना इसलिए नहीं चाहते कि उस सम्पत्ति के संग्रह करने वाले को समाज में इज्जत की दृष्टि से देखा जाता है।

श्री सीताराम एस. जाजू (मध्य भारत)ः उसको त्याग या दान कर देने वाले को भी इज्जत की दृष्टि से देखा जाता है।

सेठ गोविन्द दासः हमारे साम्यवादी और समाजवादी कहते हैं कि जितने सम्पत्तिशाली हैं वे सब चोर हैं, डाकू हैं, और उठाइगीर हैं। कुछ साम्यवादी और समाजवादी इससे भिन्न हो सकते हैं। मैं सबके लिए नहीं कहता, लेकिन बहुत ऐसे हैं कि यदि उनको यह सम्पत्ति मिल जाए तो वे समाजवाद और साम्यवाद छोड़ दें। सम्पत्ति के संग्रह करने वाले आज भी समाज में इज्जत की दृष्टि से देखे जाते हैं। हमें समाज की भावनाओं का, और मूल्यों का इस प्रकार परिवर्तन करना चाहिए कि सम्पत्तिशाली सचमुच चोर, डाकू और उठाइगीर माने जाने लगें और तब मैं कहना चाहता हूँ कि कोई भी सम्पत्तिशाली इसे अपने गले में नहीं रखना चाहेगा। तो यह उत्तराधिकार का झगड़ा सुलझाने के लिए मैं तो यह चाहता हूँ कि हमारे लॉ मेम्बर डॉ. अम्बेडकर साहब एक ऐसा विधेयक ले आयें जिससे व्यक्तिगत सम्पत्ति की समाप्ति ही हो जाय और उन लोगों का भी उद्धार हो जाए जो कि इसके चक्कर में पड़े हुए हैं।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः क्या आप इसका विरोध नहीं करेंगे?

सेठ गोविन्द दासः मेरा यह विचार है कि यह दो ही ऐसे विषय हैं, इस विधेयक में जिनके सम्बन्ध में बहुत वाद-विवाद उठाया जा सकता है। और मेरा यह भी ख्याल है कि समय को देखते हुए यदि हम इस वाद-विवाद में न पड़कर इस विधेयक को नई विधानसभा के बनने तक स्थगित कर दें और इस बीच लोगों की राय ले लें और लोगों की राय लेकर नए चुनाव के पश्चात् इस विषय को हम यहां पर लावे और इस विषय को हम हिंदू संहिता के रूप में न लावे परन्तु जिस प्रकार हमने संविधान पारित किया है, जिसमें इस देश के प्रत्येक नागरिक को अधिकार दिए हैं।

डॉ. मोनो मोहन दास (पश्चिम बंगालः सामान्य) ः महोदय मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। क्या इस प्रकार की बहस के लिए कोई समय-सीमा नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः कोई समय-सीमा नहीं है।

सेठ गोविन्द दासः तो मैं कहना चाहता हूँ और इन शब्दों से मैं अपने इस कथन को समाप्त करता हूँ, कि मैं यह आवश्यक मानता हूँ कि हमारे सामाजिक कानूनों में सुधार आवश्यक हैं। मैं यह भी जानता हूँ कि जो लोग इसका विरोध इस प्रकार करते हैं,