भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 574

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एक संयुक्त परिवार में एक असुरक्षित महिला की सुरक्षा के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। मैं जानती हूँ कि अतीत में भी संयुक्त परिवार में असुरक्षित को सुरक्षा मिलती थी। अब भी कुछ महिलाओं को सुरक्षा मिलती है परन्तु सैंकड़ों महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें संयुक्त परिवार में आश्रय नहीं मिलता और उनके पास अपने आर्थिक संसाधन न होने के कारण उन्हें अपमान भरा जीवन व्यतीत करना पड़ता है। हमारे में जो महिलाएं सामाजिक कार्य करती हैं, उनके सामने असंख्य ऐसे मामले आते हैं। जिस हिंदू समाज के बारे में आप इतना जोर-जोर से बोल रहे हैं, तो उसकी सुरक्षा के लिए महिला को उसका हिस्सा देना न केवल उचित और न्यायोचित होगा बल्कि ऐसा करना अनिवार्य है।

माननीय श्री जगजीवन रायः और इसके अतिरिक्त भी कुछ दिया जाना चाहिए।

श्रीमती सुचेता कृपलानीः यह अच्छी बात है। हमें कुछ और ज्यादा दीजिए। अतीत में आपने हमें नहीं दिया, अब हमें दे दीजिए।

जहां तक विवाह के प्रश्न का संबंध है, इस विधेयक में भ्रांति और अनिश्चितता को दूर करने तथा विवाह की प्रथाओं में एकरूपता लाने की व्यवस्था की गई है। इससे प्रथागत कानून के अंतर्गत होने वाले विवाहों के लिए कुछ कठिनाई हो सकती है परन्तु इस विधेयक में जिस सांस्कारिक और सिविल विवाह का प्रस्ताव किया गया है, उसे निर्धन और पिछड़े वर्ग अपना सकते हैं। अतः मैं नहीं समझती कि इसमें कोई कठिनाई आएगी। सांस्कारिक विवाह के पंजीकरण पर कुछ आपत्ति है। यह केवल भावनात्मक आपत्ति है क्योंकि पंजीकरण वैकल्पिक है। यदि आप पंजीकरण नहीं चाहते, तो आप पंजीकरण मत करवाइये।

एक माननीय सदस्यः यह अनिवार्य है।

माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः यह अनिवार्य नहीं है।

श्री तजामुल हुसैनः अनिवार्य नहीं है। आप चाहें तो करवाइये और न चाहें, तो मत करवाइये।

श्रीमती सुचेता कृपलानीः यदि मैंने गलत कहा है, तो डॉ. अम्बेडकर मेरी गलती दूर कर सकते हैं। यह व्यवस्था तो केवल सुरक्षा प्रदान करने के लिए की गई है।

अब मैं अन्तरजातीय और सगोत्र विवाह पर आती हूँ। मैंने अपने से पहले वाले वक्ता की बात सुनी है। मैं नहीं जानती कि अन्तरजातीय और सगोत्र विवाह पर कैसे आपत्ति की जा सकती है, जबकि समाज में अनेक ऐसे विवाह हो रहे हैं। यदि ऐसी शादियां नहीं होती, तो कोई बात नहीं परन्तु, जब ऐसी अनेक शादियां हो रही हैं, तो या तो हम उन पर दबाव डालें कि वे नियमित शादी करें या हम उन्हें हिंदू धर्म से निकाल दें, या उन्हें अन्यत्र जाने के लिए कहे या उन्हें पंजीकरण कार्यालय में जाकर विवाह पंजीकरण के