561
अतः, महोदय, और ज्यादा कुछ नहीं कहना है। केवल अपने भाइयों को यह बताना चाहती हूँ कि जब महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए दबाव डाला है, हमने महत्वपूर्ण हितों की अनदेखी नहीं की। इस मामले में हम रूढि़वादी रहे हैं। आप जानते हैं कि हमने अपने राजनैतिक अधिकारों के लिए भी गलत बातों को बढ़ावा नहीं दिया। जब अंग्रेज यहां थे, तब भी हमने हमेशा संयुक्त मतदाता की बात कही। यहां तक कि नए संविधान में भी हमने अलग अधिकारों की मांग नहीं की। यदि हम यह नहीं समझते कि यह पूरे समाज के हितों के खिलाफ होगा, तो हमने अलग अधिकारों के लिए बल दिया होता। यदि हिंदू महिला लाभान्वित होती है तो मैं समझती हूँ कि इससे पूरा हिंदू समाज लाभान्वित होगा। यह अधिकांश लोगों के हित में है। इसलिए हम इस पर जोर दे रहे हैं।
मैं यह कहना चाहूंगी कि ज्यादातर पुरुष हमारे सहायक और मददगार रहे हैं। वे हमारी प्रगति के रासते में नहीं आए हैं। यह महात्मा गांधी के प्रभाव के कारण ऐसा हो सकता है। आप सब जानते हैं कि महात्मा गांधी महिलाओं के अधिकारों के बहुत बड़े समर्थक थे। जो प्रथा उन्होंने स्थापित की, पुरुषों ने उसका अनुसरण किया है। महात्मा गांधी के प्रभाव के कारण, हमारे नेताओं के सहानुभूतिपूर्वक रवैये के कारण, हमें अपने अधिकारों के लिए कभी नहीं लड़ना पड़ा, जैसे कि अन्य देशों की महिलाओं को लड़ना पड़ा है। अतः मेरा विश्वास है कि हम अच्छी परम्पराओं का अनुसरण करेंगे, हम सहयोग की भावना को कायम रखेंगे, जैसे कि पिछले वर्षों में होता रहा है और सदस्य इस विधेयक का समर्थन करेंगे और इस बात को सोचकर इसका समर्थन करेंगे कि वे महिलाओं को अधिकार नहीं दे रहे हैं, वे महिलाओं के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं बल्कि वे समाज के साथ न्याय कर रहे हैं। यह एक ऐसा उपाय है, जिससे हम हिंदू समाज को सुदृढ़ बना रहे हैं। हिंदू समाज में बहुत दोष हैं। अब हम आजाद हैं। यदि विश्व में हमें अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रखना है, तो पहले अपने घर को व्यवस्थित करना होगा। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं, तो समाज में अपनी प्रतिष्ठा को बनाए नहीं रख सकते। अतः हम सबको मिलकर अपने घर की त्रुटियों को सुधारना चाहिए। मेरी आपसे प्रार्थना है और मेरा विश्वास है कि आप इस अच्छे उपाय का समर्थन करेंगे।
तत्पश्चात् सभा बैठक शुक्रवार, 25 फरवरी, 1945 के पूर्वाहन सवा ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित हुई।
ऽहिंदू कोडµजारी
ऽऽमाननीय उपाध्यक्षः सदन में अब डॉ. अम्बेडकर द्वारा 31 अगस्त, 1948 को प्रस्तुत निम्नलिखित प्रस्तावों पर आगे विचार किया जाएगाः
ऽसंविधान सभा (विधायी), खंड 2, भाग II, 25 फरवरी, 1949, पृष्ठ 877-78
ऽऽसंविधान सभा (विधायी), खंड 2, भाग II, 25 फरवरी, 1949, पृष्ठ 895-936