भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 577

562 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्कि हिंदू कानून की कुछ शाखाओं में संशोधन करने और उन्हें संहिताबद्ध करने वाले विधेयक, जैसा कि प्रवर समिति ने रिपोर्ट दी है, पर विचार किया जाए।य्

पंडित ठाकुर दास भार्गव।

श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल-मुस्लिम)ः महोदय, मैंने संशोधन प्रस्तुत किए हैं और मैं समझता हूँ कि उन पर मैं बोलूं और दूसरे सदस्य पर बोलें। यदि मैं अपनी बात कहने के बजाय अब उनकी बात सुनता रहूँ और उसके बाद बोलूं, तो उन्हें उत्तर देने का अवसर कहां मिलेगा?

माननीय उपाध्यक्षः मैं समझता हूँ कि संशोधन प्रस्तुत करने वाले सदस्य बात में बोलें, तो उनके लिए अच्छा रहेगा क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें उत्तर देने का अवसर नहीं मिलेगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं उत्तर देना नहीं चाहता।

माननीय उपाध्यक्षः यह अच्छा रहेगा कि माननीय सदस्य अपने प्रस्ताव के विरोध और समर्थन में कुछ भाषण सुनें ताकि वे उत्तर दे सकें और वे एक बार ही बोल सकें। मैंने पंडित ठाकुर दास भार्गव को बोलने के लिए कहा है। किस सदस्य को कब बोलना है, यह निर्णय करना अध्यक्षपीठ का काम है। मैं समझता हूँ कि पंडित दास भार्गव बोलें तो, अच्छा रहेगा।

पंडित ठाकुर दास भार्गव (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः महोदय, हिंदू संहिता विधेयक, जो पूरे भारत मेंख्...,

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः माननीय सदस्य ने कहा, मैं समझ नहीं पाया।

श्री नजीरुद्दीन अहमद ः उन्होंने डॉ. डी.एन. मित्तर की वर्तमान रिपोर्ट का खंडन करने के लिए उन्हीं एक पिछले लेख का उदाहरण दिया। हमारे पास उनका पहले वाले लेख के साथ-साथ बाद वाला लेख भी है और मैंने दोनों पर विचार किया है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने उनका वाद वाला लेख नहीं देखा है। वह क्या हैं?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः वाद वाला लेख इस रिपोर्ट में है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आपने बाद वाला लेख कहा तो मुझे लगा कि आप इसके बाद की किसी चीज पर बात कर रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः सवाल यह है कि उनका पहले वाला लेख क्या था और मौजूदा लेख क्या है तथा क्या कोई बदलाव नहीं है? यदि हाँ, तो कौन-सा बदलाव हुआ है? उन्होंने बहुत पहले एक पैंफलेट लिखा था