भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 578

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः पैंफलेट।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः एक पुस्तक।

माननीय डॉ. डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे लगा की अभी आप ने ‘पेम्फलेट’ बोला।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः आप जो भी नाम चाहें दे दें। मैं नाम के लिए नहीं लड़ता।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह किताब कितनी बड़ी थी जिसके बारे में आप कुछ बता सकते हैं?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह आपको लाइब्रेरी में मिल जाएगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप इसे पैम्फलेट बता चुके हैं। यह ‘‘पेम्फलेट कितना बड़ा है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः अगर जिरह ही करनी है, तो मुझे ‘विटनेस वॉक्स’ में बुला लिया जाए, मैं तब जवाब दूंगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह जानना चाहूँगा कि मेरे मित्र संदर्भ देने से पहले तथ्यों के प्रति आश्वस्त हैं। यदि यह सक पैम्फलेट है, तो मुझे बहुत आश्चर्य है। यह किताब लगभग 700 पृष्ठों की है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः आकार ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसमें अभिव्यक्त विचार महत्वपूर्ण है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, विचार क्या थे?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः उसमें अभिव्यक्त विचार ये थे कि हिंदू महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें बेहतर अधिकार दिए जाएँ। मैं माननीय मंत्री के सामने हर बात दोहरा नहीं सकता, क्योंकि मैं सदन में हंगामा खड़ा करना नहीं चाहता और इससे ज्यादा जोर से नहीं बोलना चाहता। वर्तमान विचारों में उन्होंने इस विधेयक का विरोध किया है। और माननीय मंत्री के दिमाग में स्पष्ट रूप से उनके पहले वाले विचार हैं, तथा अधिकांश सदस्य इसका फायदा उठा रहे हैं। मैं बताना चाहता हूँ कि विचारों का परिवर्तन के पक्ष में तर्क स्वयं डॉ. डी. एन. मित्तर ने दे दिए हैं। अगर विचारों का परिवर्तन अपराध है, तो विचारों का अंधानुकरण, जबकि यह गलत साबित हो चुका हो, तर्क पर आधारित परिवर्तन से ज्यादा बड़ा अपराध है। डॉ. मित्तर ने महिलाओं को और अधिक अधिकार दिए जाने के पक्ष में अपने स्पष्ट विचार रखे हैं। मैंने परिशिष्ट -II का एक अनुच्छेद पढ़ा है, जिसमें सरकार ने लोगों को वचन दिया है कि विधेयक को