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फ्हिंदू विवाह के प्रकार के तारतम्य में संहिता के भाग II की धारा 6 के हम बताना चाहेंगे कि देश के कुछ भागों में काफी समय से ऐसे रिवाज या प्रथाएं हैं, जो वैध विवाहों को मान्यता प्रदान करती हैं, जो कि उस श्रेणी के अन्तर्गत नहीं आएंगे, जो इस भाग में दिए गए प्रावधानों के अनुसार सांस्कारिक अथवा सिविल विवाहों की श्रेणी में आते हैं। इसलिए हम धारा 6 के अन्त में ऐसे प्रावधान का प्रस्ताव देंगे, जो ऐसे विवाहों की वैधता की पुष्टि करें।य्
यह क्या है? मैं समझता हूँ कि भारत के उस भाग की कठिनाई भी ऐसी ही है, जहां से श्री भारती आते हैं।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः सौभाग्यवश में उस भाग से नहीं आता। मैं तमिलनाडु से हूँ और वे मलाबार से आते हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः जहां तक दत्तक लेने का प्रश्न है, मैं इस असहमति की टिप्पणी में वही बात पाता हूँ। इसलिए केवल पंजाब अकेले नहीं है। यह अन्य भागों में भी है। जहां विवाह और तलाक तथा गोद लेने के नियम परम्परावादी नियमों से अलग हैं। अतः उन सभी को संरक्षित किया जाना चाहिए और मैं इस बात से अति प्रसन्न हूँ कि असहमति रखने वाले सदस्यों ने इस बारे में टिप्पणी कर अपने निर्वाचन-क्षेत्र का बहुत अच्छा प्रतिनिधित्व किया है।
मैं सांस्कारिक विवाहों की बात कर रहा था। जहां तक गैर-सांस्कारिक विवाहों का संबंध है, मैंने उनके बारे में एक शब्द भी नहीं कहा है। मैं चाहता हूँ कि उनकी भी सुरक्षा की जाए। सांस्कारिक विवाहों के संबंध में समिति ने जो विध्वंस किया है, उसकी अभिव्यक्ति नहीं की जा सकती। मैं एक बार भी नहीं समझ पाता कि सिविल विवाह को इस अध्याय में कैसे सम्मिलित किया जाए। यदि यह सिविल विवाह है, तो वह सिविल संहिता का विषय है। हमारे पास 1872 का अधिनियम हैं। यह बहुत त्रुटिपूर्ण अधिनियिम है और मैंने इसे सुधारने के लिए एक विधेयक प्रस्तुत किया है। और विधेयक जिसे मैंने कुछ दिन पूर्व इस सदन में सभी दूसरे विवाहों को वैध बनाया जा सके, वे हमारी बहुत अधिक रक्षा करेंगे, इस संहिता को यहां समाहित करने की अपेक्षा। मैं समस्त भारत के लिए एक समान सिविल संहिता के पक्ष में हूँ और मैं चाहता हूँ कि सभी के लिए नियम समान हों। हमारा कर्तव्य है कि हम ऐसा करें परन्तु यहां हम सिविल विवाह को क्यों सम्मिलित करते हैं? यदि उस कानून को दोषयुत प्रभावों को अलग हटाना है, तो दूसरे रास्ते खुले हैं। इस सिविल संहिता में क्या होता है तथा नए प्रकार के विवाह में क्या होता है, जो न तो सांस्कृतिक होता है न सिविल विवाह होता है। वरना एक सांस्सारिक पंजीकृत विवाह होता है, जिसमें सांस्सारिक रूप में सम्पन्न होता है किन्तु वह मूल रूप से कौटुम्बिक व्यभिचार ही है। इसके बाद आप पंजीकरण करने वाले अधिकारी के पास जाते हैं और आप उसको वैध बना लेते हैं।