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पा रहे थे। उन्हें और उनकी भावनाओं को दबा पाना मुश्किल था और इसलिए साक्ष्य के लिए आगे की कार्यवाही पूरी तरह रोक दी गई। उन्होंने इसी का उल्लेख किया है। अगर वह अपनी बात पर दृढ़ नहीं रहने के दोषी हैं, तो भी उन्हें थोड़ी ईमानदारी दिखाने का श्रेय तो दिया ही जाना चाहिए।
बाबू रामनारायण सिंहः सुनिए सुनिए।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः क्या अपने विचारों पर कायम रहने का मतलब, अपने विचारों से चिपके रहना है, भले ही ये विचार गलत साबित हो गए हों? यह असंगति है या हठधर्मिता है। यह न अच्छाई है, न ही उचित है। इन सज्जन को जब पता चला कि न केवल पुरुष मत अपितु स्त्री मत पूरी तरह उनके विरुद्ध थे, तो उन्होंने कहा कि वे भी इसके विरुद्ध थे। क्या किसी व्यक्ति के लिए यह उचित या अच्छा होगा कि उनके इस बेहुदे व्यक्तिगत मत का उल्लेख करें? यदि ऐसा है, तो कोई भी माननीय मंत्री के लेखों व भाषणों का उल्लेख भी उनके विरुद्ध कर सकता है। पर ऐसा उचित नहीं होगा। अतः प्रत्येक लेख एवं भाषण को संदर्भ के अनुसार ही लिए जाएं।
ऐसा प्रायः इसलिए किया जाता है कि हम जनता के लिए करते हैं, अतः उनके हित में हमें अपने व्यक्तिगत मत को दबाना पड़ता है। अतः डॉ. मित्तर ने भी अपने देश के हित में ऐसा किया और जनता के मत को बचाने के लिए साहसपूर्वक अपने व्यक्तिगत मत को त्याग दिया। यहाँ डॉ. मित्तर ने एक देशभक्त के रूप में अपने कर्तव्य का परिचय दिया, इसलिए उन पर दोषारोपण नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह, अन्य माननीय सदस्यों ने भी क्या कर दिया है? मैं उन पर नाराज नहीं होना चाहता हूँ, लेकिन, उन सभी ने यह वादा कर दिया है कि अब विधेयक पर जनमत के परिप्रेक्ष्य में विचार किया जाएगा। पर वे अपने निजी मतों पर भी अडिग हैं। असल में वे डॉ. मित्तर थे उनके मत बदले जाने के लिए तंग किया जा रहा हैं। महोदय, क्या हमें अपने मत कभी भी बदलने नहीं चाहिएं? पर हमें अपने मतों में परिवर्तन लाने ही होंगे।
माननीय अध्यक्षः ध्यान दीजिए। मैं, माननीय सदस्य को बताना चाहूँगा कि उन्हें प्रत्येक मुद्दे पर सामान्य सिद्धांतों और सभी विवरणों में जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें, केवल मुद्दे पर ध्यान आकर्षित कराना है तथा अगले मुद्दे पर जाना है। क्योंकि यदि वे इसी तरह चलते रहेंगे तो अगले दो दिन तक चलते रहेंगे-इस चर्चा का कोई अंत नहीं होगा। और मैं उन्हें इस तरह चलते जाने के लिए अनुमति नहीं दूंगा। उन्हें उपयुक्त समय के अंदर अपनी बात अवश्य समाप्त करनी है और मेरा मानना है कि अगले 15 मिनट इसके लिए पर्याप्त हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं आपके आदेश का पालन करता हूँ। श्रीमान्, मुझे आशा है कि ये पन्द्रह मिनट मुझे पूरे दिए जाएंगे।