566 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय अध्यक्षः हाँ, वे 3-15 तक अपनो वक्तव्य पूरा कर दें।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं इस तथ्य पर जोर देना चाहता हूँ कि हमारा देश प्रजातांत्रिक है। हम प्रजातांत्रिक निकाय के तौर पर कार्य कर रहे हैं। हम नहीं कह सकते कि प्रजातंत्र हमारे समाज के लिए अनुप्युक्त है। वह प्रजातंत्र ही है जो हमें यहाँ लाया है। उक्त प्रजातंत्र ब्रिटिश सरकार से शक्ति हस्तातंरण के लिए पर्याप्त थी। प्रजातंत्र हमें हमारा संविधान बनाने की शक्ति के लिए पर्याप्त है तथा मेरा मानना है कि प्रजातंत्र हिंदू, कानून के मामले में इसके अपने हितों को समझने के लिए लक्ष्य प्रतिष्ठा और सक्षम है। अतः, जन- मत से न बचा जाए न इसे नशरअंदाज किया जाए, न ही इसके प्रति अरुचि दिखाई जाए।
इस जनमत को सुनिश्चित करने में कौन-सी हानि है? वस्तुतः मेरा कथन है कि विधेयक की काँट-छाँट की गई है। इसके असामान्य परिवर्तन किए गए हैं। मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि इसमें अनिष्ठकारी असामान्य परिवर्तन किए गए, अपितु सत्यनिष्ठ परिवर्तन ही किए गए। तथापि असामान्य परिवर्तन भी कम नहीं हैं। बाइबल में भी परिवर्तन किए गए हैं, किन्तु सत्यनिष्ठ परिवर्तन। ऐसा किसी बड़े अधिकारी विद्वान ने किया है। इसलिए, मेरा कथन है कि विधेयक में अनेक परिवर्तन हुए हैं। बहरहाल, यह विधेयक प्रवर समिति के पास इस आश्वासन के साथ प्रस्तुत किया गया था कि इसमें कोई गंभीर परिवर्तन नहीं किए गए थे तथा जो कुछ परिवर्तन किए गए थे, उन्हें सदस्यों के नोटिस में लाया गया था। फिर भी महोदय, यह सभी सदस्यों के लिए संभव या व्यावहारिक है कि उन सभी परिवर्तनों को नोट किया जा सके? वस्तुतः यह असंभव है कि इन सभी परिवर्तनों को नोट किया जा सके। अतः प्रवर समिति को बताया गया था कि विभागीय विधेयक मूल विधेयक की एक पुनकृर्ति मात्र है और कोई गंभीर परिवर्तन नहीं किए गए हैं। इसीलिए वे वहाँ उन परिवर्तनों को नोट करके विचार करने में विफल रहे। यह उनकी गलती नहीं है। इस परिप्रेक्ष्य में, हालाँकि प्रवर समिति ने अन्जाने में ही अपनी पर्याप्त कोशिश की थी। मेरा कथन है कि आश्वासत के कारण ही उन्होंने महत्वपूर्ण परिवर्तनों को नोट करना छोड़ दिया होगा और इसके बाद श्रीमान यदि ऐसा हुआ है, यदि काफी परिवर्तन किए गए है, और ये परिवर्तन महत्वूर्ण हैं, तभी प्रवर समिति को बहुमत द्वारा आश्वासन दिया गया था कि विधेयक इस तरह परिवर्तित नहीं किया गया था। लेकिन यह पुनः प्रकाशन के लिए दिया गया मात्र एक सामान्य-सा आश्वासन था। उन्हें बताया गया था कि विधेयक इस तरह संशोधित नहीं किया है जैसा स्थाई आदेश 41(5) के अंतर्गत पुनः प्रकाशन के लिए अपेक्षित है, अतः प्रवर समिति द्वारा यथासंशोधित विधेयक पारित किया जाए। यह केवल सामान्य रूप से रखा जाने वाला प्रमाणपत्र है। अतः मैंने सभी गंभीरताओं के परिप्रेक्ष्य पूछा है कि क्या किए गए परिवर्तनों के खुलासे के आलोक में विधेयक अत्यधिक ढंग से संशोधित नहीं किया गया है? मूल विधेयक पर हमने जनमत नहीं लिया था और जो