580 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बंधन है, यह ऐसा कोई बंधन नहीं है, जिसे कभी भी समाप्त कर दिया जाए। यह कोई अनुबंधित संबंध नहीं है। यह ऐसा संबंध है जिसमें आध्यात्मकता का पुट भी रहता है। कल्पना के किसी भी दायरे में, किसी भी पक्ष द्वारा छल या कपट से इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। यही हिंदू विवाह की अवधारणा रही है। जहाँ तक हिंदू ग्रंथों का संबंध है, तो मैं यहाँ किसी ऐसे ग्रंथ या स्मृति या उद्धरण को भी चुनौती देता हूँ जो इसके विरोध में हो। अतः, मेरा कथन है कि जहाँ तक धारा 100 में समाहित ‘विवाह और तलाक’ में सिविल विवाह का संबंध है, तो उसमें हिंदू कानून में सिविल विवाह के लिए अपेक्षित शर्तें शामिल की गई हैं। इसमें धारा 7 की उप-धारा 6 में वर्गीत प्रावधानों को छोड़ दिया है और धारा 7 की अन्य 5 उप-धाराओं तक सीमित रखा है। अतः सपिण्डों के बीच विवाह पूर्णतः वैध है, बशर्तें यह धारा 10 के अंतर्गत एक सिविल विवाह हो। यह सांस्कारिक विवाह की वैधता और सिविल विवाह की वैधता के मध्य विभेद या अंतर है। तब धारा 21 क्या कहती है? इसके अनुसार यह उन पार्टियों पर निर्भर है, जो धारा 7 में वर्गित सांस्कारिक विवाह करते हैं फिर पंजीयक के पास जाते हैं। और उनसे सिविल विवाह पंजीकृज कराने का अनुरोध करते हैं, और पंजीयक के पास भी इसके सिवा कोई विकल्प नहीं है। इन तीन प्रावधानों का कानूनी प्रभाव क्या है? वह सच है कि सपिंडों के बीच कोई विवाह न किया जाए। यह शर्त अनुच्छेद 10 में नहीं है और पंजीयक इस तथ्य को जानते हुए कि इस कारण से सांस्कारिक विवाह अवैध है फिर भी वह इसे सिविल विवाह के तौर पर पंजीकृत कर सकता है। अतः यहाँ सांस्कारिक विवाह के छद्म का अनावरण हो जाता है क्योंकि इस तरीके से सपिंडों के मध्य किया गया विवाह कपटपूर्ण है। फिर भी वे इसे सांस्कारिक विवाह के तौर पर कर सकते हैं, इसके बाद सिविल विवाह करके इसकी अवैधता को निरस्त कर सकते हैं।
अब हम अनुच्छेद 8 के प्रावधानों पर आते हैं। यह उल्लिखित है कि सांस्कारिक विवाह को ‘विवाह प्रमाणपत्र रजिस्टर’ में भी दर्ज कराना चाहिए और यदि इसे दर्ज नहीं किया जाता तो चूकने वाले को नियमानुसार दंडित किया जा सकता है। जहाँ तक इसकी वैधता का संबंध है, तो यह संदेहास्पद है कि यह वैध है या अवैध। यकीनन, राउ विधेयक की सीमाएँ थीं। विधेयक संबंधित पक्षों को छूट देता था कि वे इसका इन्दराज रजिस्टर में कराए या नहीं। राव विधेयक में केवल इस उद्देश्य से यह प्रावधान समाहित किया गया था कि इससे विवाह का साक्ष्य सुविधाजनक बन जाता। किंतु इस प्रयोजन को मौजूदा विधेयक में शामिल नहीं किया गया है। यहाँ उल्लिखित है कि ऐसा किसी भी प्रांतीय सरकार पर निर्भर है कि वह सांस्कारिक विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य करे या नहीं करे। अनुच्छेद 6 के प्रावधान के अनुसार कोई विवाह तभी वैध होगा, जब वह विधेयक के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाए। यदि ऐसा नहीं किया