भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 599

584 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह मुझे भी स्वीकार्य है। किंतु यदि आप संयुक्त हिंदू परिवार पद्धति का आदर करते हैं तो आपका दायित्व है कि इसका अंत न करें, क्योंकि इसका विदेशी शासन के दौरान काफी हनन हो चुका है। अतः संयुक्त हिंदू परिवार पद्धति में जो कठिनाइयां और त्रुटियां उत्पन्न हो गई हैं, उनका विधायी निराकरण किया जाए और इसकी पूर्ववत् स्थिति को पुनस्थिपित किया जाए। उसकी पुरानी अच्छाइयों को भी बरकरार रखना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं किया जाता है। मैंने माननीय कानून मंत्री से भी कोई ऐसा शब्द नहीं सुना है जिसमें संयुक्त परिवारों की किसी हानिकारक त्रुटि का जिक्र किया गया हो।

महोदय मैं कहता हूँ कि इस विधेयक के माध्यम से संयुक्त हिन्दू परिवारि को टुकड़ों में बांटा जा रहा है। राउ समिति ने जो प्रस्ताव दिया था वह इतना खतरनाक नहीं था, जैसा हम विधेयक के प्रावधानों में प्रस्तावित है। मैं वर्तमान विधेयक की धारा 86 और 87 पर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ। भाग III -ए की धारा 1 और 2 में राउ समिति ने केवल यह उल्लेख किया है कि परिवार में मुखिया की मृत्यु होने पर, सम्पत्ति पर जीवित सदस्यों का अधिकार न होकर उत्तराधिकारियों का होगा। इसका आशय कम से कम एक पीढ़ी तक मुखियागिरी को कायम रखना है। वर्तमान प्रवर समिति और हमारे कुछ सदस्यों सहित कानून मंत्री द्वारा यह भी सहन अथवा पसंद नहीं किया गया।

फलस्वरूप उपबंध 86 और 87 के साथ इस अधिनियम को लागू किए जाने से यह निश्चित है कि भारत में विद्यमान प्रत्येक संयुक्त परिवार में स्वतः ही विवाद पैदा हो जाएंगे।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः संयुक्त परिवार और संयुक्त सम्पत्ति के बची अन्तर है।

पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः मैं इसी बात पर आ रहा हूँ।

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः यह आपको पटरी से उतारना चाह रहे हैं। और कृपया अपनी बात जारी रखें।

पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः विधेयक की धारा 86 और 87 में उल्लेख है कि कोई भी कानूनी अदालत जन्म के आधार पर किसी दावे को संज्ञेय रूप में नहीं लेगी। जिस दिन यह विधेयक प्रभावी हो जाएगा। इसके बाद प्रत्येक संयुक्त परिवार विघटित माना जाएगा, ताकि संयुक्त किरायेदारी को सामान्य किरायेदारी के साथ-साथ इस विधान के द्वारा परिवर्तिक किया जा सके। किन्तु मैं पूछता हूँ, आप ऐसा क्यों चाहते हैं? क्या कानून में, विद्यमान हिन्दू संयुक्त परिवार में आज कोई अनिश्चितता है? मैं सादर कहना चाहता हूँ, नहीं है। हर कोई जानता है कि सहसमांशित का क्या अर्थ है और सहममांशिता वाली सम्पत्ति की क्या-क्या स्थितियाँ हैं। पर आप इसे विभाजित क्यों करना चाहते हैं?