भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 605

590 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ऽहिन्दू संहिता - जारी...

माननीय उपाध्यक्षः जैसा प्रवर समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, अब हम हिन्दू कानून की विभिन्न धाराओं को संशोधित और उनको संहिताबद्ध करने के लिए प्रस्तारित विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए आगे कार्रवाई करेंगे। इसलिए श्री मुकुट बिहारी लाल भार्गव अपना भाषण जारी रखें।

श्री आर.के. सिंधवा (सी.पी. और बेरारः सामान्य)ः इससे पहले कि हम इस विधेयक पर विचार-विमर्श शुरू करें, हम जानना चाहेंगे कि इस संबंध में कार्यक्रम क्या है। क्या यह अनिश्चित समय के लिए जारी रहेगा? मैं आम सहमति से यह अनुरोध करूंगा कि माननीय सदस्यों के भाषणों के लिए कुछ समय-सीमा निर्धारित की जाए, ताकि जितना संभव हो सके, उतने सदस्य इस विचार-विमर्श में भाग ले सकें।

माननीय उपाध्यक्षः मैं सदन को सूचित करना चाहता हूँ कि यह एक सरकारी विधेयक है और उन्हें दो दिन का समय दिया गया है। अतः अध्यक्ष इसमें कुछ नहीं कर सकता।

पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गव (अजमेर-मेड़वाड़)ः महोदय, मैं हिन्दू संहिता पर अपना असमाप्त भाषण जारी रखना चाहूँगा। किन्तु महोदय, इससे पहले मैं इस स्मरण् ाय सत्र के पहले दिन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा की ओर सादर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ।

महोदय, माननीय प्रधानमंत्री ने इस उपाय का एक सरल और आवश्यक कानून के रूप में हवाला दिया था। इसके उत्तर में मैं सादर निवेदन करता हूँ कि यह उपाय जो सदन के समक्ष विचार-विमर्श के लिए रखा गया है, इतना सरल नहीं है। मैं यह बताने की आज्ञा भी चाहता हूँ कि इस विधेयक के कुछ विरोधी देरी किए जाने वाली नीतियां अपनाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री द्वारा भी दोषी ठहराए गए हैं। वे इस असेम्बली और यहाँ चल रही कार्यवाही से भली-भांति परिचित हैं तथा शीघ्र ही जान जाएंगे कि इस उपाय पर पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं हुआ है। मैं कहना चाहूँगा कि यह इतना महत्वपूर्ण उपाय है, जो हिन्दू समाज के जीवन और मृत्यु के प्रश्न को प्रभावित करने जैसा है, जो केवल बहुत थोड़े समय के लिए सदन के संज्ञान में लाया गया है। यदि आप पिछले अवसरों को देखें जब शारदा अधिनियम और हिन्दू महिलाओं के लिए सम्पत्ति के अधिकार अधिनियिम जैसे कानून इस विधायिका के समक्ष रखे गए थे, आप पाएंगे कि उनसे कितने विवाद उत्पन्न हुए थे। उन विधेयकों की तुलना में, यह विधेयक बहुत ही ज्यादा महत्व

ऽसी.ए. (विधि.) डी., खंड 6, भाग II, 12 दिसंबर, 1949, पृष्ठ 464-91