भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 606

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का है। यह पूरे हिन्दू समाज के मूलभूत ढांचे को प्रभावित करता है। श्रीमान्, यदि इस विधेयक को संविधि पुस्तक में रखा जाता है, तो इस पर लोग मुझसे भिन्न मत भी रख सकते हैं, माननीय प्रधानमंत्री मुझसे भिन्न मत रख सकते हैं-इससे हिन्दू समाज का सम्पूर्ण विनाश हो जाएगा। किन्तु मैं ऐसा सोचता हूँ कि अभिप्राय यह नहीं है कि तीस मिलियन हिन्दू अपने विलोप होने के लिए उठ खड़े होंगे, बल्कि यह कि हिन्दू समाज की विशिष्ट विशेषताएं और चरित्र विलुप्त होना जारी रखेंगे।

यह कोई सरल उपाय नहीं है। तथ्य यह है कि इस विधेयक का उद्देश्य पूरे ढांचे का सम्पूर्ण उन्मूलन करके हिन्दू समाज का निर्माण करना है। इसका उद्देश्य विवाह कानून में परिवर्तन, तलाक संबंधी कानून, गोद लेने संबंधी कानून, अल्पसंख्यक और संरक्षण संबंधी कानून, हिन्दू संयुक्त परिवार कानून, उत्तराधिकार संबंधी कानून और हर उस कानून में परिवर्तन करना है, जो हिन्दू समाज और उसकी बची हुई विशेषताओं का निर्माण करता है। कुल मिलाकर इससे नींव का मात्र एक स्तंभ नहीं, बल्कि वे सभी स्तंभ, जिन पर हिंदू समाज टिका है, हिल रहे हैं। इसलिए महोदय, यह कहना स्पष्ट और उचित होगा कि कानून बनाने वालों के रूप में, हम चूंकि जनता के हितों के सरंक्षक हैं, हमें अपनी पूर्ण क्षमता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना चाहिए और ये देखना चाहिए कि हम जिन उपायों पर विचार कर रहे हैं, देश की जनता उन्हें कितना चाहती है। एक साधारण कानून के रूप में इस उपाय का बखान करना, मैं सादर कहना चाहता हूँ, उचित नहीं है।

आगे मेरा कहना है कि यदि एक साधारण कानून के रूप में इसका बखान करना उचित नहीं है, जो एक अनिवार्य उपाय के रूप में इसे चित्रित करना भी हानिकारक ही है। मैं सादर पूछता हूँ कि इस उपाय के लिए, आवश्यक क्या हैं? यदि इस विधेयक को स्थगित रखा जाता है और नई विधायिका, स्वतंत्र भारत में वयस्क मताधिकार के साथ प्रभुसत्ता संपन्न संसद का चुनाव होने तक इसे संविधि-पुस्तक में नहीं रखा जाता है, तो क्या होगा? क्या कोई ऐसी व्याधि है जिससे हिन्दू समाज इतनी अनिवार्यता के साथ ग्रस्ति है कि यदि इस विधेयक को संविधि-पुस्तक में रखे बिना कुछेक माह गुजर जाते हैं, तो पूरा समाज टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर जाएगा? मैं कहता हूँ कि किसी भी रूप में यह अनिवार्य नहीं है। अतः हम बहुत अच्छी तरह से एक या दो और वर्षों तक प्रतीक्षा कर सकते हैं। हिन्दू समाज, जो सदियों से सफलतापूर्वक बना हुआ है, जिसने कई सभ्यताएं, कई विदेशी आक्रमण देखें हैं और सैकड़ों वर्षों तक राजनैतिक गुलामी भी देखी है, वह इस छोटे से कानून के बिना एक या दो और वर्षों तक बहुत अच्छी तरह रह सकता है।

श्रीमान्, यदि हम प्रतीक्षा करें....