592 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री एस. नागप्पा (मद्रासः सामान्य)ः श्रीमान्, मुझे आपत्ति है। माननीय सदस्य सदन पर आरोप लगाते हुए कह रहे हैं कि यह सदन इस मामले पर कार्रवाई के लिए सक्षम नहीं है और हमें एक नए सदन के चुनाव तक प्रतीक्षा करनी चाहिए।
माननीय उपाध्यक्षः मि. नागप्पा ने जो कुछ कहा है, उसमें आपत्ति जैसी कोई बात नहीं है।
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः श्रीमान्, अपने माननीय मित्र द्वारा बाधा पहुँचाए जाने के बावजूद मैं जोर देकर यह कहना चाहूँगा कि जिस रूप में यह सदन निर्वाचित है, उसमें यह इस प्रकार की महत्वपूर्ण प्रकृति के उपाय पर कार्रवाई करने के लिए सक्षम नहीं हैं। अतः प्रश्न यह है कि...
श्री तजामुल हुसैन (बिहारः मुस्लिम)ः श्रीमान्, मुझे आपात्ति है। अध्यक्ष द्वारा यह निर्णय दिया जा चुका है कि यह सदन इस विधेयक पर कार्रवाई के लिए सक्षम है। उस नियम के बाद, क्या कोई माननीय सदस्य यह प्रश्न उठा सकता है कि सदन सक्षम है अथवा नहीं?
माननीय उपाध्यक्षः इसमें कोई हानि नहीं है अध्यक्ष का निर्णय है कि यह सदन इस विधेयक पर विचार करने के लिए सक्षम है और इसके अनुसार ही इस विधेयक का अवलोकन किया जा रहा है। यदि माननीय सदस्य कोई अन्य प्रश्न उठाना चाहें, विधिक का तकनीकी बाधाओं के अलावा कोई अन्य कारण रखना चाहें तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। किंतु मैं माननीय सदस्य को परामर्श दूंगा कि पिछले वक्ताओं में से लगभग हरेक ने इस मुद्दे को उठाया है और यह मुद्दा अब लगभग बासी हो चुका है।
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः महोदय, केवल मेरे माननीय मित्र की बाधा ने मुझे उकसाया है कि मैंने यह टिप्पणी की है। इस महत्वपूर्ण उपाय को पारित करने के लिए मैंने विधायिका की संवैधानिक शक्ति पर कोई प्रश्न नहीं उठाया था। किन्तु प्रश्न एक औचित्य का है। क्या आप एक पूर्ण-रुपेण विधायिका के कार्यों को अपना सकते हैं, क्या यह सदन, जिसका प्रादुर्भाव भारत के संविधान का निर्माण के विशेष उद्देश्य से किया गया है, ऐसा कर सकता है? अतः मेरा कहना है कि प्रश्न की संवैधानिक अवधारण के अलावा, इस विधायिका की संवैधानिक शक्ति के मुद्दे के अलावा, यह प्रश्न एक औचित्य का है, और औचित्य भी एक बहुत ही महत्व का है। और मैं महसूस करता हूँ कि अपने काबिल दोस्त द्वारा बाधा पहुंचाए जाने के बावजूद मुझे अपनी आत कहने का अधिकार है, और सदन में जो मेरे उक्त मित्र के साथ हैं, वे इस बहुत ही महत्व वाले उपाय पर कार्रवाई से पहले तीन बार अवश्य सोचें। और मेरा यह भी कहना है कि यह उपाय अनिवार्य नहीं है और सरकार को इस प्रश्न को सदन के समक्ष विश्वास