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अन्य स्रोत से जो सम्पत्ति प्राप्त होती है, वह पूर्णतया उसी की सम्पत्ति होगी और महिला की सम्पत्ति के अंतरण के नियम धारा 106 से 109 में दिए गए हैं। पर ये प्रावधान पारिवारिक जीवन में शांति बनाए रखने में सहायक नहीं हैं, इनकी प्रवृत्ति विघटनकारी है। यहाँ भी प्रत्येक प्रावधान हिंदू आदर्शों की स्वीकार्य अवधारणा का विरोध करता है और आप देखेंगे कि एक महिला को जो पैतृक सम्पत्ति मिलती है और धारा 91 के अनुरूप जो पूर्णतया उस महिला की ही सम्पत्ति होगी, उसे धारा 106 से 109 के अंतर्गत निचले क्रम पर रखा जाएगा। इस प्रकार उत्तराधिकार की सम्पत्ति पति और बच्चों में समान रूप में बंट जाएगी। यदि पति अथवा बच्चे नहीं हों, तो विधेयक के अंतर्गत कौन व्यक्ति सम्पत्ति का उत्तराधिकारी होगा। इसमें माता-पिता और पति के संबंधी हो सकते हैं। मैं इस सदन के प्रत्येक माननीय सदस्य से विनम्र और सादर भाव से पूछता हूँ कि क्या हिन्दुओं की इस धरती पर कोई ऐसा माता-पिता हैं, जो अपनी पुत्री से सम्पत्ति प्राप्त करना चाहेंगे।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः क्यों नहीं? इसमें क्या नुकसान हैं?
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः शायद मेरे माननीय मित्र भारत से नहीं विदेश से आए हैं।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः मैं दक्षिण भारत से हूँ।
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः भारत में कोई भी माता-पिता शायद ही अपनी पुत्री से कुछ प्राप्त करने की सोचेंगे।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः पंजाब में ऐसा होता होगा।
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः पूरे उत्तर भारत में ऐसा होता है। दक्षिण भारत के बारे मैं अधिकारपूर्वक नहीं कह सकता। किंतु जहाँ तक उत्तर भारत का संबंध है यह विचार ही घृणास्पद है। निस्संदेह यह नियम उन लोगों के लिए अपवाद स्वरूप है जो धन और सम्पत्ति से बड़ा कुछ भी नहीं मानते। उनके लिए धर्म और चिन्ता का विषय नहीं है। परन्तु मैं उन अपवादों की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं उत्तर भारत के साधारण माता-पिता की बात कर रहा हूँ। वे अपनी पुत्री से कुछ स्वीकार करें यह सोचकर ही उनकी आत्माएं विद्रोह कर देंगी। कन्यादान के समय जब एक पिता और माँ एक-साथ बैठकर अपनी पुत्री का हाथ वर के हाथ में देते हैं, तथा उसे देहज और आभूषण आदि भी देते हैं, उसके बाद हमारे देश में इस हिस्से में, माता-पिता अपनी पुत्री के घर का पानी तक नहीं पीते।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः हमारे यहाँ कि स्थिति इतनी खराब नहीं है।
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः यह आपके यहाँ एक रिवाज हो सकता है या प्रचलन हो सकता है, किन्तु हमारे यहाँ अधिकाशं लोग इस विचार का विरोध करेंगे। वे