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सदन पूर्णतया सक्षम अथवा सार्वभौम नहीं है। यदि सदन इस कार्रवाई पर दृढ़ रहती है, तो उसमें कोई गलत नहीं है, परन्तु मैं यह देखना चाहूँगा कि इस विधेयक पर विचार किया जाए और उसके प्रत्येक हित के साथ न्याय किया जाए। ठीक इसी समय मैं एक अधिवक्ता के रूप में और सदन के सदस्य के रूप में यह कहना चाहता हूँ कि इस विधेयक पर प्रवर समिति द्वारा फिर से विचार किया जाना चाहिए, चाहे वह दो घंटे के लिए ही क्यों न हो, ताकि इसकी सभी गलतियों को दूर किया जा सके और इस मूल विधेयक को विधि के अनुकूल बनाया जाए। खंड प्रति खंड उसमें एक वाक्यांश बाद दूसरे वाक्यांश विचार करते हुए और इसी विधेयक को स्थानापन्न किया जाए, यदि प्रवर समिति चाहे। मैं कहता हूँ कि यह कहना नितांत त्रुटिपूर्ण है कि मूल विधेयक पर विचार उसी प्रकार किया गया था, जैसाकि कानूनन आवश्यकता है, उस पर विचार करने की, अथवा संशोधन उसी प्रकार प्रस्तावित या स्वीकृत किए गए, जैसे प्रत्येक प्रवर समिति द्वारा किए जाते हैं। ऐसा नहीं किया गया था। हमें नितांत सावधान रहना चाहिए कि हम किसी बात की अनुमति न दें कि चीजें जैसी हों जो मूल रूप से गलत हैं। मैं डॉ. अम्बेडकर से यह विचार करने के लिए निवेदन करूँगा यदि वे संतुष्ट हैं कि मेरी आपत्ति सही है, मैं उनसे निवेदन करूंगा कि वे कृपापूर्वक पंजाब के गरीब लोगों के दृष्टिकोण से विचार कर लें जिनका हिंदू विधि समिति में कोई प्रतिनिधित्व नही था।
माननीय सदस्यः डॉ. बक्शी टेकचंद के बारे में क्या कहना है?
पंडित ठाकुर दास भार्गवः यदि आप उन डॉ. टेकचंद की बात करते हैं, जो इस प्रवर समिति में थे, तो मुझे प्रसन्नता होगी। यदि आप उस पर भी वजन दें। यदि उन्होंने यह असहमति की टिप्पणी नहीं लिखी होती तो आप कहां रहते। यदि आप उन्हें स्वीकार करते हैं ऐसा व्यक्ति जिनके विचारों का आदर किया जाना चाहिए तो उनके विचारों के साथ जाएं, यह मेरी प्रस्तुति है। मैं सिर्फ उसकी आवाज अथवा ध्वनि विस्तारक यंत्र हूँ जो डॉ. बक्शी टेकचंद ने लिखी है। उन्होंने अपनी टिप्पणी में यह कहा है कि आपको उत्तराधिकारी के नामांकन को अनुमति देनी चाहिए जैसे कि आप तलाक को अनुमति दें, होने के लिए उसी प्रकार जैसे कि आज हो रहा है। उन्होंने गैर-सांस्कारिक विवाहों के बारे में भी उल्लेख किया है। इन सभी बातों के बारे में जब आप उनका नाम लेते हैं, तो आपसे मेरा निवेदन है कि आप कृपापूर्वक उनका अनुसरण करें, जो उन्होंने अपनी असहमति की टिप्पणी में की हैं।
माननीय उपाध्यक्षः श्रीमती रेणुका रे।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान मेरी शिकायत नहीं सुनी जा रही।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य की शिकायत अनसुनी नहीं रहेगी।