608 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय सदस्य कृपया प्रतीक्षा करें और देखें। इस विधेयक पर सामान्य चर्चा काफी पहले 24 फरवरी, 1949 को शुरू हुई थी। यह चर्चा 25, 26, 28 फरवरी, 1 मार्च, 1 अप्रैल और 2 अप्रैल को जारी रही। यह माननीय सदस्य ने छह घण्टे और आठ मिनट लिए। कुल मिलाकर हमने 6 दिन, 9 घण्टे और 20 मिनट इस में व्यतीत किए। इस विषय पर अभी तक केवल 14 माननीय सदस्य बोल चुके हैं। अंतिम वक्ता जिन्होंने अभी अपनी चर्चा समाप्त की है, वे पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गव हैं, जिन्होंने 2-4-49 को अपराह्न 3.15 बजे चर्चा आरंभ की थी, जो 5 तारीख तक दोपहर 1.45 बजे तक जारी रही। आज भी वह 11.50 बजे से 12.57 बजे तक बोले। इस गति से, यदि सभी माननीय सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाएगा। तो हमें लगभग एक वर्ष तक बैठना होगा। सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। भाषणों में उठाए गए अनेक मुद्दे काफी जागरूक करने वाले हैं। भाषणों के विरुद्ध मैं कुछ नहीं कहूँगा। किन्तु, माननीय सदस्यों की ओर से बोले जाने के बड़ी संख्या में अनुरोध मुझे प्राप्त हुए हैं।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेय (पं. बंगालः सामान्य) हम सभी इतने अंधेरे में हैं हमें हर ओर प्रकाश चाहिए।
माननीय उपाध्यक्षः प्रकाश हर तरफ से आ रहा है। किन्तु हम यदि इसी गति से चलते है_ तो हर ओर से प्रकाश नहीं आ पाएगा। अतः, मैं माननीय सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि वे, जहाँ तक संभव हो, अपने भाषणों को आधे घण्टे की सीमा के भीतर समिति करें। सभी संकल्पों के लिए माननीय सदस्यों को पन्द्रह मिनट का समय दिया जाता है और इस समय के भीतर वे अच्छी तरह से अपनी बात रख सकते हैं। मैंने उन्हें दुगना यानी पर्याप्त समय दिया है। किन्तु मैं इसके लिए आग्रह नहीं करता। यह सदन को मेरा सुझाव भर है। अन्यथा, यदि कल समापन किया जाता है, तो संभवतः उस समय तक कभी-कभी जानबूझ कर अथवा अनजाने में, अनेक सदस्य बोल चुके होंगे, और तब यदि सदन के समापन की घोषणा हो तो, उसे भी स्वीकार करना होगा। मैं इस बारे में अग्रिम चेतावनी दे रहा हूँ।
माननीय श्री के. संथानम (परिवहन और रेल राज्य मंत्री)ः मैं केवल यह कहना चाहता हूँ कि मैं आपके द्वारा निर्धारित समय-सीमा से पहले ही अपनी बात समाप्त कर लूंगा। मुझे आशा है कि आप मुझे अपराह्न में अपनी बात रखने की अनुमति देंगे।
माननीय उपाध्यक्षः यह मुझे पहले नहीं कहना चाहिए था। यह निर्णय मैं माननीय सदस्यों पर छोड़ रहा हूँ, ताकि सभी सदस्यों की बराबर मौका मिल सके। सामान्यतः यदि सदन सहमत हो तो, मैंने आधे घण्टे की समय-सीमा सुझाई है।
कुछ माननीय सदस्यः सहमत हैं।