भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 624

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कुछ माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।

माननीय उपाध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्ड, श्री साहू कुछ कहना चाहते हैं।

श्री लक्ष्मीनारायण साहू (उड़ीसाः सामान्य)ः महोदय, मैं जानना चाहूँगा कि क्या उन सदस्यों को बोलने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी, जो अपना भाषण पांच, सात अथवा दस मिनटों तक सीमित रखने के इच्छु हों।

माननीय उपाध्यक्षः इस प्रकार, यदि मुझे उक्त सुझाव स्वीकार करना है, तो मुझे उम्मीद है कि माननीय सदस्य अपने पत्रों में मुझे यह संकेत भी देंगे कि वे कितने मिनट लेना चाहते हैं और जैसे ही उक्त समय पूरा होगा मैं घंटी बजा दूंगा।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः इससे पहले कि आप सदन स्थगित करें, मैं केवल एक बात कहना चाहता हूँ। अपने अभी कहा है कि यह पूरी तरह सदस्यों पर निर्भर है कि वे कब समापन करना चाहते हैं। किन्तु समस्त संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, यह अध्यक्ष पर निर्भर है कि क्या चल रही चर्चा पर्याप्त है अथवा नहीं और क्या समापन न्यायोचित है अथवा नहीं। यह एक स्थापित प्रक्रिया है और आपने भी दोहराया है कि आप इसका पालन करते हैं। उक्त बयान के मद्देनजर, क्या आप आज भी, पहले यह बात कह सकते हैं, कि कल आप समापन स्वीकार कर लेंगे?

माननीय उपाध्यक्षः अध्यक्ष को अग्रिम तौर पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है। अब दोपहर का एक बज रहा है और सदन 2.30 जब तक के लिए स्थगित किया जाता है।

तत्पश्चात् दोपहर के भोजन के लिए सदन 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

दोपहर 2.30 बजे सदन पुनः शुरू हुआ, उपाध्यक्षप महोदय (श्री एम. अनंतसमनम आयंगर) ने अपना आसन ग्रहण किया।