612 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(एक माननीय सदस्यः मेरा एक प्रश्न है। ) आप इस पर प्रश्न कर सकते हैं, किन्तु मैं सोचता हूँ कि सर बी.एन.राउ माननीय सदस्य की अपेक्षा कहीं अधिक बड़े कानूनी जानकार हैं।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः यह कोई तर्क नहीं है। वह हो भी सकते हैं, और नहीं थी। मैं तर्क को समझता हूँ, किन्तु मैं इस तरह के आक्षेप का पक्ष नहीं ले सकता।
माननीय उपाध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः किंतु उस तर्क का क्या अर्थ है कि फलाँ-फलाँ व्यक्ति यहाँ उपस्थित व्यक्तियों से ऊपर है? क्या यह कोई तर्क है?
माननीय उपाध्यक्षः इसका भी कोई अर्थ नहीं है कि माननीय सदस्य एक साथ बोले जा रहे हैं। प्रत्येक माननीय सदस्य को अवसर मिलेगा और जब तक सदन चाहेगा, मैं यहाँ बैठने को तैयार हूँ।
जहाँ तक माननीय सदस्य द्वारा सर बी. एन. राउ संदर्भ देने का संबंध हैं, शायद उनका आशय था कि वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के जज थे और यह कहना अससंदीय नहीं है कि किसी व्यक्ति विशेष की राय अति महत्वपूर्ण है। एक व्यक्ति के रूप में भी माननीय सदस्य का शायद यह आशय था कि वह उन्हें किसी अन्य सदस्य की तुलना में ज्यादा अच्छी तरह जानते हैं।
माननीय श्री के. संथानमः महोदय, मैंने मात्र यह कहा था कि सर बी.एन. राउ प्रश्नकर्ता से बेहतर कानूनी जानकार हैं।
साजेन्ट रोहिणी कुमार चौधरीः श्रीमान्, मुझे एक आपत्ति है। हिंदू कानून पूर्णतया और आंतरिक रूप से हिंदू धर्म से संबद्ध है। तब क्या कोई यह बात बर्दाश्त कर सकता है कि कोई गैर-हिंदू व्यक्ति हिंदू कानून और सिद्धांतों का प्राधिकारी हो सकता है।
माननीय अध्यक्षः मैं माननीय सदस्यों के मतभेदों की बहुत सराहना कर सकता हूँ। किन्तु इसमें उत्तेजित होने जैसी कोई बात नहीं हैं पहले हम धैर्य रखें और सभी माननीय सदस्य एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में ही चर्चा में अपना-अपना योगदान दें।
श्री. एल. कृष्णास्वामी भारतीः जिस माननीय सदस्य ने अभी व्यवधान डाला है उन्होंने यह कहा प्रतीत होता है कि श्री बी. एन.राउ हिंदू नहीं है यह एक छल-कपट वाली बात है, जिसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। श्री बी.एन. राउ यहाँ नहीं हैं, अतः महोदय, उनका बचाव करना आपका कर्तव्य बनता है।
माननीय अध्यक्षः मैं यह बताने की स्थिति में नहीं हूँ कि कोई व्यक्ति विशेष किस धर्म से है। मैं व्यक्तिगत तौर पर यह नहीं जानता। किंतु मैं उम्मीद करता हूँ कि माननीय सदस्य अपनी सीमा में रहेंगे, और चूंकि उन्हें कुछ अधिकार प्राप्त हैं, इसके बल