हिन्दू संहिता - जारी... - Page 629

614 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हूँ। मुझे आश्चर्य है कि भविष्य पर नजर रखने वाले किसी भी हिंदू को यह कहना चाहिए कि जहाँ तक कानून का प्रश्न है, कोई एकीकरण आवश्यक नहीं है। प्रत्येक भाग में एक क्षेत्रीय कानून हो सकता है, जैसे बंगाल में हम दायभाग कानून को रख सकते हैं, मालाबार में मरुमाकट्टय कानून और अन्य भागों में मिताक्षर कानून इत्यादि का पालन हो सकता है, जैसा कि प्राचीन समय में होता था। जब लोग यह कहते हैं कि राजनीति और अर्थव्यवस्था के मामले में हमें 1950 ई. में होना चाहिए, तो मैं लोगों की बात समझ नहीं पाता हूँ, किन्तु जहाँ तक कानून का सवाल है, क्या हमें 1950 ई. पू. में होना चाहिए? महोदय, ऐसा कहना पूरी तरह से एक विघटनकारी और विनाशकारी स्थिति है। यदि हिंदूओं को एक समुदाय बनना है, यदि उन्हें अपनी महत्ता बरकरार रखनी है, उन्हें एक कानून, भले ही वह दायभाग हो अथवा मिताक्षर के अंतर्गत आना चाहिए। मैं समझ सकता हूँ कुछ लोग कहते हैं कि ‘‘हमें मिताक्षर के अंतर्गत लाना चाहिए।’’ मैं अन्य लोगों की बात को भी समझता हूँ कि उन सभी को दायभाग कानून के अंतर्गत लाया जाए। किन्तु यह कहा जाता है कि हिन्दुओं को विभिन्न क्षेत्रीय समूहों में विभक्त किया जाना चाहिए, जिसमें प्रत्येक का अपना कानून हो। तब यदि एक बंगाली, मालाबार में जाता है, तो न्यायालयों को तीन प्रकार के हिंदू कानूनों की व्याख्या करनी होगी, जो मैं सोचता हूँ कि, हिंदू समाज के दुर्भाग्य का फैसला होगा। महोदय, हिंदू समाज के शत्रु इससे बेहतर कुछ मांग नहीं कर सकते कि हिन्दुओं पर एक दर्जन क्षेत्रीय कानून लागू किए जाएं। महोदय, इस विधेयक के द्वारा हम अंततः हिंदू समाज को एक एकीकृत हिंदू कानून के अंतर्गत ला रहे हैं, चाहे वह कोई भी कानून हो। अतः संपूर्ण हिंदू समाज के लिए एक एकीकृत हिंदू कानून ही होना चाहिए। महोदय, इस विधेयक में...

सार्जेन्ट रोहिणी कुमार चौधरीः महोदय, एक नियमापति है। माननीय सदस्य इस सदन में साम्प्रदायिकता की बातें कर रहे हैं। वे समस्त हिंदुओं को, संभवतः मुस्लिमों और ईसाईयों के विरुद्ध एक करने की बात कर रहे हैं। वे हिंदुओं के लिए एक कानून चाहते हैं_ अतः वे साम्प्रदायिकता का उपदेश दे रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः यह नियमापति केवल बहस को उकसाने वाली है, अतः यह वास्तव में कोई आपत्ति वाली बात नहीं है।

माननीय श्री के. संथानमः महोदय, जिस दिन यह विधेयक विधान पुस्तक में आ जाएगा इसे अपनाने की समस्त प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी और इससे पहले कि यह प्रक्रिया लंबी चले इस देश में शेष भारतीय नागरिक भी उक्त कानून के अनुसार व्यवहार करना आरंभ कर देंगे। और यदि आवश्यक हुआ, तो हम उनमें मामूली बदलाव भी कर देंगे, ताकि पूरा देश एक सिविल कोड के अंतर्गत आ सके। महोदय, यह प्रक्रिया एक