हिन्दू संहिता - जारी... - Page 631

616 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः आदिकालीन!

माननीय श्री के. संथानमः या तो हम कानून के द्वारा जानबूझ कर उन्हें हटा दें, अन्यथा वे अनियमित अव्यवस्थित तरीके से स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः तो अन्य मामलों में भी बंगाल का ही अनुकरण किया जाए।

कुछ माननीय सदस्यः ऑर्डर, ऑर्डर।

सार्जेन्ट रोहिणी कुमार चौधरीः महोदय, एक व्यवस्थागत आपत्ति है, कि किसी सदस्य को ‘ऑर्डर, ऑर्डर कहने का क्या अधिकार है। मैंने देखा है कि श्रीमती दुर्गाबाई भी ‘ऑर्डर, ऑर्डर’ कह रही थी।

श्रीमती रेणुका रे (पं. बंगालः सामान्य) क्या यह कोई आपत्ति है?

माननीय अध्यक्षः मैं यह देखकर बहुत प्रसन्न हूँ कि मेरे साथ-साथ माननीय सदस्य भी अध्यक्ष के अधिकार का अनुमोदन कर रहे हैं।

सार्जेन्ट रोहिणी कुमार चौधरीः (खड़ी हो गईं)।

माननीय श्री के. संथानमः मुझे खेद है कि मैं असम की अपनी माननीय मित्र को रास्ता नहीं दे सका।

सार्जेन्ट रोहिणी कुमारी चौधरीः ठीक है, मैं चुप रहूंगी। यदि आप महिलाओं की क्रूरता से दुखी होना चाहते हैं, तो आप दुखी हों।

माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर।

माननीय श्री के. संथानमः महोदय, संयुक्त परिवार के तथाकथित पवित्र संस्थान के बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है। मध्यकालीन और प्राचीन काल में, यह तथाकथित संयुक्त परिवार अवश्य ही उपयोगी उद्देश्यों की पूर्ति करता होगा। मेरा यह काम नहीं है कि मैं उसे झुठलाऊँ। किन्तु, आज संयुक्त परिवार केवल विवादों में हैं। मैं कृषक वर्गों को जानता हूँ_ मैं आपमें से कई लोगों की अपेक्षा संभवतः सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहा हूँ। मैंने लगातार दस वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर कार्य किया है। श्रीमान्, मैं एक बात जानता हूँ कि जब एक किसान के बेटे का विवाह होता है, तो किसान अपने बेटे के लिए एक नया घर बनाता है, उसे पैतृक भूमि का हिस्सा देता है, भले ही वह एक एकड़ हो अथवा आधा एकड़ अथवा एकड़ का चौथाई हिस्सा हो, पर अपने बेटे का एक अलग परिवार बसाता है। जब तक ऐसा न किया जाए, किसान यह मानता है कि उसके परिवार में एकता नहीं रहेगी। कुछ बहुत अमीर व्यक्तियों के मामले में, तथाकथित