हिन्दू संहिता - जारी... - Page 632

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संयुक्त परिवार व्यवस्था बनी रह सकती है, जिसमें आय-कर संबंधी धोखेबाजी और अन्य उद्देश्यों के लिए लेखा-जोखा रखने की दोहरी प्रणाली अपनाई जा सकती है। साधारण रूप से, आज भी, मध्यम वर्गीय परिवारों में, क्या होता है? एक बेटा गांव में रहता है_ एक बेटा दिल्ली में रहता है और सरकारी नौकरी करता है_ एक बेटा मद्रास में रहकर कोई अन्य नौकरी करता है_ एक अन्य बेटा बिजनेस करता है। तब एक संयुक्त परिवार चलाने और पैतृक सम्पत्ति का रख-रखाव करने का क्या अर्थ है? इससे बेहतर है कि उन्हें बँटवारे की अनुमति दी जाए। तत्पश्चात्, यदि वे स्वेच्छा से वापस आना चाहें और एक साथ रहना चाहें तो, उन्हें एक सहकारी संस्था बनाने दें, उन्हें आधुनिक परिस्थितियों के अनुकूल किसी भी प्रकार का विधिक व्यक्तित्व बनने दें। अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करने वाली संयुक्त परिवार व्यवस्था को वर्तमान परिस्थितियों पर ध्यान दिए बिना, जारी रखने के लिए, मैं समझता हूँ कि यह कोरी रूढि़वादी परंपरा चलाना होगा।

श्री ब्रजेश्वर प्रसाद (बिहारः सामान्य) एक प्रतिवादी निर्णय करने लगा है!

माननीय श्री के. संथानमः मेरे बिहार के माननीय मित्र प्रतिवादी का सबसे बड़ा उदाहरण है, जैसा कि संविधान के निर्माण के समय उन्होंने सिद्ध किया था। और मुझे यकीन है कि वह यहाँ भी सिद्ध करेंगे।

श्री ब्रजेश्वर प्रसादः आप भी।

माननीय श्री के. संथानमः मैं कोई मौका नहीं दे रहा हूँ।

माननीय अध्यक्षः आप आपस में बातें न करें। मुझे बेहद अफसोस है_ मैं भी इसमें थोड़ा शामिल रहा हूँ और मैंने पाया है कि एक तरह का कटु वाद-विवाद जारी है। जब तक अच्छा हास-परिहास चले, उसमें कोई नुकसान नहीं है। तथापि, माननीय सदस्य को अपना पक्ष रखने की अनुमति मिलनी चाहिए। अन्यथा वह अपनी बातों के क्रम में गड़बड़ी कर सकते हैं। इससे वह हतोत्साहित होंगे।

सार्जेन्ट रोहिणी कुमार चौधरीः श्री संथानम बहुत अच्छे मूड में हैं।

माननीय श्री के. संथानमः क्योंकि मेरा पक्ष सरल और सीधा-सादा है और मुझे किसी के प्रति खराब व्यवहार करने अथवा किसी तरह का हौआ खड़ा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

अब मैं अगले तथ्य, तर्क संगतिकरण, पर आता हूँ। यह ऐसा बिंदु है, जिससे पिता की सम्पत्ति में पुत्री के अधिकार पर बड़ी मात्रा में विरोध उठ खड़ा हुआ है। यदि कोई पुरानी सम्पत्ति बँटवारे के बिना रह सकती हो और उस सम्पत्ति में केवल कृषि भूमि शामिल हो, तो तुझे ऐसा कहने वालों के प्रति सहानुभूति है, जो कहते हैं कि परिवार में