हिन्दू संहिता - जारी... - Page 636

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माननीय श्री के. संथानमः मेरे मित्र ने कहा ‘‘किसी जाति के बिना, हिंदू कौन हो सकता है?’’ पर मेरे अनुसार, किसी जाति के साथ हिंदू एक राक्षस है। (सुनिए, सुनिए)। हम इस देश में एक जाति रहित हिंदू समुदाय स्थापित करना चाहते हैं। या तो हम पूर्णतः हिंदू होना बन्द करें, अथवा एक जाति विहीन हिंदू धर्म की स्थापना करें। हमारे लिए इसके सिवा विकल्प नहीं बचा है।

श्री लक्ष्मी नारायण साहूः मुसलमानों को भी हिंदू कहा जा सकता है।

माननीय श्री के. संथानमः जिस दिन मुसलमान, गीता और वेदों को स्वीकार कर लेंगे, उसी दिन से मैं उन्हें भी हिंदू मानने को तैयार हो जाऊँगा।

माननीय उपाध्यक्षः हम एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी न करें। माननीय सदस्य अपनी बात जारी रखें। हर कोई एक-दूसरे को प्रभावित करना चाहता है।

माननीय श्री के. संथानमः व्यावधानों के बावजूद, मैं अपने कुछ मित्रों को आश्वस्त करना चाहता हूँ। मेरे मित्र भी तिरुमला राव ने कहा है कि मैं गीता की शपथ ले रहा हूँ। मैं कहा रहा हूँ कि प्राचीन ग्रंथ हिंदुओं के लिए न्यूनतम धर्म सिद्धांत बताते हैं। इस प्रकार, यदि विधेयक के बाद, हिन्दू, मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच कोई भेदभाव नहीं रखा जाता, तो यह पूरे देश के लिए बेहतर होगा। हम ऐसे भेदभावों को बनाए रखने से गौरवान्वित नहीं होते, जिनका कोई अर्थ नहीं है अथवा जो असंगत है। यदि मुसलमान भी ऐसे सभी भेदभाव समाप्त कर दें तो असंगत होते हैं_ यदि ईसाई भी वे सभी भेदभाव समाप्त कर दें, जो असंगत हैं, तो एक लंबी बातचीत से पहले हम स्वयं को ऐसी जगह पा सकेंगे, जहाँ हम सब एक हो सकते है- भले ही हम अपने आपको कुछ भी कहें। इसी बीच, संविधान में और इस विधेयक में हमारा उद्देश्य यह देखना है कि इस देश में बहुसंख्यक समुदाय शक्तिशाली हो, एकीकृत हो और उसमें वे पूर्वाग्रह और प्रतिक्रियाएं न हों, जो हमें सम्प्रदायों में विभक्त करती हो। हमें तो ऐसा सशक्त आधार चाहिए जिस पर भावी भारत के गौरव और शक्ति का सृजन किया जा सके। मुझे विश्वास है कि इस विधेयक के बिना और यह विधेयक जिन परिवर्ती की हामी देता है, के बिना हिंदू समुदाय एक कमजोर, टूटा-फूटा एवं अप्रगतिशील समुदाय रहेगा और यदि अधिसंख्यक लोग इस अवस्था में बने रहेंगे, तो हम उन राजनीतिक और आर्थिक अवसरों पर अधिक लाभ नहीं उठा सकेंगे जो संविधान और ईश्वर ने हमें प्रदान किए है। अतः मैंने कहा है कि यह वस्तुतः उस संविधान का पूरक है, जिसका हमने निर्माण किया है और यह कहना श्रेयस्कर होगा कि जिस निकाय ने संविधान का निर्माण किया है, वही इस हिंदू संहिता को कानून के रूप में सामने ला रहा है। मैं आशा करता हूँ कि इस बात को संविधान में शामिल किया जाएगा और हमारी भावी पीढ़ी यह कहेगी कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने न केवल संविधान का निर्माण किया है बल्कि हिंदू कानून में भी सुधार किया है।