हिन्दू संहिता - जारी... - Page 637

622 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः संविधान को नष्ट कर दिया है।

माननीय श्री के. संथानमः मुझे विश्वास है कि हमारे पूर्वज हमें देख रहे हैं और इस कार्य के लिए हमें आशीर्वाद दे रहे हैं।

श्री लोकनाथ मिश्रः मैं एक जानकारी देना चाहता हूँ। मेरे मित्र ने अभी-अभी वेदों और भागवद् गीता की शपथ ली है। क्या वह ऐसे किसी प्रावधान को अस्वीकार करने को तैयार हैं, जो इनके सिद्धांतों के विरुद्ध जाएगा।

माननीय श्री के. संथानमः यदि वे गलत सिद्धातों पर आधारित होंगे, तो मैं उन्हें अस्वीकार करने के लिए बाध्य हूँ।

माननीय उपाध्यक्षः इस तर्क पर अधिक बात करना अनावश्यक है।

माननीय श्री के. संथानमः श्रीमान् मैं सदन को उबाना नहीं चाहता। मैंने उन मुख्य मुद्दों पर बात की है जो मेरे दिमाग में आए हैं मैं उनसे अपील करना चाहता हूँ जो प्राचीन पूर्वाग्रहों के कारण यह महसूस करते हैं कि उनका कर्तव्य विधेयक का विरोध करना है, वे एक अन्य दृष्टिकोण से अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करें। दृष्टिकोण है, एक जातिरहित हिंदू समुदाय का, जिसमें भेदभाव नहीं हो, जहाँ सभी एकसमान हों। यदि हम वर्तमान में बिखरे हुए, कमजोर और एक हजार वर्ष से दासोचित हिंदू समाज को एक बहुत सशक्त, स्वस्थ और महान समुदाय में परिवर्तित कर सकें तो हम ऐसा काम कर पाएंगे जिस पर हमारे पुत्र और पौत्र गौरव का अनुभव करेंगे।

श्री एच.वी. पाटसकर (बर्म्बः सामान्य)ः महोदय, हम एक ऐसे विधेयक पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, जो हिंदू समाज के ढांचे में क्रांति लाने जा रहा है। ऐसा समाज जिसमें इस समय 25 करोड़ से अधिक लोग शामिल हैं। अतः यह अस्वभाविक नहीं है कि जो कुछ घटित हो रहा है उनमें आम आदमी ने भी रुचि लेनी शुरू कर दी है और यह सभी के हित में है और इस तथ्य पर ध्यान दिया जाए कि जब हम इस विधेयक के माध्यम से हिंदू समाज के सम्पूर्ण ढांचे में क्रांतिकारी परिवर्तन करने जा रहे हैं, तो यह वांछनीय नहीं है कि हम उन भावनाओं को अनदेखा करें, जो विधेयक में निहित प्रावधानों के संबंध में आम आदमी के जहन प्रावधानों के संबंध में आम आदमी के जहन में उठ चुकी हैं।

इस समय आम आदमी शिक्षा के मामले में पिछड़ा हुआ है। वह अपनी और अपने आश्रितों के जीवन-यापन की समस्या से चिंतित है। वह पैसे की कमी के चलते और कुछ नहीं तो कपड़ों की कमी भी झेलता है, और सामान्यता वह अपने जीवन को बहुत कष्टप्रद पाता है। इसके बावजूद, उसने इस विधेयक में रुचि लेना आरंभ किया है क्योंकि