हिन्दू संहिता - जारी... - Page 638

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वह सोचता है कि यह विधेयक उसके हिंदू समाज के उस ढांचे को प्रभावित करने जा रहा है, जो पिछली कई शताब्दियों के विकास का परिणाम है। अतः हमें समाज के संपूर्ण ढांचे के बदलने जैसे गम्भीर कार्य को करने से पहले उस समाज से जुड़े व्यक्ति को शिक्षित करना चाहिए। मैं सर्वप्रथम यह स्पष्ट करूंगा कि मैं विधेयक के कई प्रावधानों के विरुद्ध नहीं हूँ, परन्तु इस उद्देश्य के लिए जो समय चुना गया है, मेरी समझ से वह सर्वाधिक असामयिक है। मैं केवल 20 मिनट का समय लेना चाहता हूँ और यदि मुझे बिना व्यावधान अपनी टिप्पणीयां करने की अनुमनि दी जाए तो, मैं इतने समय में अपनी बात समाप्त कर सकूंगा, क्योंकि मुझे पता है कि इस सदन के अनेक सदस्य पक्ष में अथवा विपक्ष में बोलकर इस चर्चा में भाग लेना चाहते हैं।

जहाँ तक मैं विधेयक के बारे में आम आदमी की प्रतिक्रिया को समझ सका हूँ, मैं सोचता हूँ कि इस सरकार को अपना ध्यान आम आदमी को प्रभावित करने वाली समस्याओं जैसे भोजन, कपड़ा, मुद्रा स्फीति और अन्य कई बातों पर केन्द्रित करना चाहिए। जब वह अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए चिंतित हैं और उसे अपने जीवन-यापन की आवश्यकताएं पूरी करनी हैं तो वह स्वभाविक रूप से पूछ सकता है कि सरकार क्यों चिंतित है कि उसका विवाह कैसे होना चाहिए? उसकी केवल एक पत्नी होनी चाहिए अथवा उससे ज्यादा, जबकि वह अकेले का पेटे तक नहीं भर सकता। ये सब चीजें आवश्यक भी हो सकती हैं और मैं उनमें सुधार का विरोधी नहीं हूँ। यह माना जा चुका है कि हमारे नेता भी कह रहे हैं कि हम नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। हम आम लोगों कि कठिनाइयां जानते हैं। अभी भोजन, कपड़ा और जीवन की अन्य आवश्यकताओं का अभाव है। यों आम आदमी की तुलना में हम यहाँ सुखमय जीवन जी रहे हैं। वह स्वाभाविक रूप से सोचता है कि नेताओं को विवाह, उत्तराधिकार आदि से संबंधित समस्याओं के बारे में सोचने की बजाय दिन-प्रतिदिन की समस्याओं के हल पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। ये बातें सदियों पहले से चली आ रही हैं और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह सब, कुछ महीनों अथवा कुछ वर्षों तक अभी ऐसे ही चलता रहे।

यदि हमारी बहनें, जो विधेयक के बारे में उत्साहित हैं अथवा हमारे अन्य मित्र, जो हिंदू कानून के तत्काल संहिताकरण और संशोधन की दुहाई दे रहे हैं, यदि वे ग्रामीण क्षेत्रों में आम आदमी के समक्ष प्रस्ताव रखें तो वे पाएंगे कि वह अन्य कई बातों के प्रति अधिक चिन्तित हैं कि वह आश्चर्यचकित है कि इस समय आपको इस सदन में इस प्रकार के उपाय करने की आवश्यकता होने लगी है। वह स्वाभाविक रूप से सोचता है कि इसे आने वाले समय पर छोड़ देना चाहिए। देश में अनेक प्रकार के असंतोष व्याप्त हैं। विभाजन के कारण शरणार्थियों की समस्या है जिनके पुनर्वास और जीवन-यापन की जरूरतें हैं। तो इस समय क्या यह आवश्यक है हम इस प्रश्न पर इतनी गंभीरता से सोचें कि हमारे विवाह किस प्रकार होने चाहिएं?