हिन्दू संहिता - जारी... - Page 639

624 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अतः इस विधेयक को प्रस्तुत करने के लिए जो समय चुना गया है, वह उपयुक्त नहीं है और इससे स्थिति बेहतर होने के बजाय खराब होने की संभावना है।

इस संहिता के अंतर्गत किन विषयों पर चर्चा की गई है? विवाह, उत्तराधिकार तथा दत्ततकग्रहण, जहाँ तक विवाह का सम्बन्ध है तो यहाँ वर्तमान सिविल विवाह अधिनियम है, जिसके अंतर्गत जो परंपरागत तरीके से विवाह नहीं करना चाहते विवाह कर सकते हैं। वस्तुतः ऐसे कई लोग कर भी रहे हैं। अतः, इस पर कार्यवाही करना इतना तत्कालिक नहीं है जितना दर्शाया गया है।

एक माननीय सदस्यः उस अधिनियम के अंतर्गत आपको बताना होगा कि आप किसी भी धर्म से सम्बन्ध नहीं रखते हो।

श्री एच.वी. पाटसकरः मेरे प्रिय मित्र अब ऐसा नहीं हैः- यह अतीत के गर्त में चला गया है। अब सिविल विवाह के अंतर्गत कोई भी दो हिंदू जो किसी भी जाति या समुदाय से संबंधित हैं, किसी भी धर्म से संबंधित नहीं होने की घोषणा किए बिना भी शादी कर सकते हैं, और उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता।

उत्तराधिकारी से संबंधित प्रश्न के बारे में काफी ऊहा-पोह है। हमने अपने संविधान में लिंग की समानता के सिद्धांत दिए हैं और आज के दौर में किसी के लिए यह मुमकिन नहीं कि उससे पीछे हट जाए। अतः लिंग की समानता के संबंध में कोई आपत्ति भी नहीं है। एक पिता के जिसके एक पुत्र और एक पुत्री है, इन दोनों को वह समान रूप से प्यार करेगा और इनमें कोई भेद-भाव नहीं करेगा। किंतु उत्तराधिकार के मामले में उन्हे अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है। इस संबंध में आपको हमारे समाज के मौजूदा ढांचागत कई सदियों के दौरान हुई प्रगति का परिणाम है। हिंदू धर्म उस तरह का धर्म नहीं है जिस तरह ईसाई धर्म है, पारसी धर्म है, या इस्लाम एक धर्म है...

एक माननीय सदस्यः तब वह धम्र कैसा है?

श्री एच.वी. पाटसकरः ईसाईयत ऐसा धर्म है जिसमें वे ईसा मसीह में विश्वास रखते हैं और बाइबल में दिए उनके उपदेशों का अनुसरण करते हैं। पारसी लोग जोरास्टर के अनुयायी हैं और इस्लाम धर्म में वे पैगाम्ब्र मोहम्मद में विश्वास रखते और कुरान उनकी पवित्र पुस्तक हैं। किंतु हिदू धर्म क्या है? हिंदुत्व में न केवल वेदों के अनुयायी या राम व कृष्ण या शिव के अनुयायी हैं या विभिन्न रूपों में अनेक देवताओं के भक्त शामिल हैं, अपितु इसमें प्रकृति की पूजा करने वाले और किसी भी तरह के नास्तिक तथा जो भगवान के एकल रूप में विश्वास नहीं रखते, वे भी शामिल हैं। इनके पूजा स्थल, पूजा पद्धति और पूजा का उद्देश्य भी अलग-अलग तरह के होते हैं। हिंदुत्व में उत्तरोत्तर प्रगति हुई है जिसमें सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं की धाराएँ एवं उपराधाएँ हैं तथा