हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 64

49

को अधिक अवसर नहीं दिया था। फिर भी विरोधियों ने कई पैम्फलेट निकाले थे, हमारे राष्ट्रीय नेताओं को बुरा-भला कहते हुए, हमारे प्रिय नेता महात्मा गांधी को भी नहीं छोड़ा था। उस समय एक साप्ताहिक पत्र ‘हिंदू’ नाम से प्रकाशित किया जाता था जिसमें इन विधेयकों पर आक्रमण किया गया था और उन पर इस आधार पर आक्रमण किया गया था कि इस देश के राष्ट्रीय नेता उसके पीछे थे और उन्हीं के परामर्श के कारण तथा उनके प्रभाव के अधीन ऐसा किया जा रहा था। इस तथ्य के साथ जब सरकार ने देखा कि इस देश की महिलाएं तैयार नहीं थीं जो उनको और आगे बांटना चाहती थीं तथा उनमें वैमनस्य लाना चाहती थीं। जब यह महसूस किया कि महिलाएं पृथक मतदान की विरोधी हैं और वे उन लोगों के पीछे खड़ी हैं, जो इस देश की आजादी के आन्दोलन के लिए कटिबद्ध थे, तब अधिक आशा नहीं थी कि इस प्रकार का विधान कई महिलाओं को उन्नत करने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए सत्ता में विदेशी सरकार के रहते पारित हो जाएगा। यह तब जब हमने यह महसूस किया कि उस समय तक प्रतीक्षा करना आवश्यक था, जब तक राष्ट्रीय सरकार सत्ता में आ जाए। बाद में सरकार ने हिंदू विधि समिति की नियुक्ति की और इन विधेयकों का पुनः प्रचार-प्रसार किया गया। इस सदन को ज्ञात है कि उस समिति ने देश भर में दौरा करने के बाद प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। अंतरिम सरकार के आने के बाद 1946 में हजारों व्यक्तियों और संगठनों के अभिमत लेते हुए, मैं उसके बाद के कामों को फिर से याद नहीं करूंगी जब यह विधेयक इस विधानमंडल के समक्ष 1947 के बाद, पुनः प्रस्तुत किया गया जैसा कि इस सदन के सदस्यों को भली-भांति ज्ञात है। परन्तु मैं केवल यही बताना चाहती हूँ कि विरोधी स्वर का यथार्थ और चरित्र एक जैसा है, का नयी पहुंच के साथ है। मैं जानना चाहती हूँ कि वे कौन से व्यक्ति हैं जिन्होंने उन दिनों काँग्रेस का विरोध किया था, आज यह कहने के लिए कि यदि हिंदू संहिता अधिनियम पारित किया गया तो आप चुनाव में हार जाएंगे। मैं उनसे यह पूछना चाहूंगी जब वे स्वतंत्रता आंदोलन के विरुद्ध जान-बुझकर, जब उन्होंने इस आंदालेन का न तो समर्थन किया था, न इस आंदोलन के साथ कोई सहानुभूति दिखलाई थीµजब इसके होते हुए भी काँग्रेस ने चुनाव जीते और देश को आजाद कराया। तब आज वे कौन हैं जो कांग्रेस से कहें कि काँग्रेस चुनाव नहीं जीत पाएगी। यदि उनमें से कोई व्यक्ति आज देश के विधानमण्डलों में आता है तो यह कांग्रेस की ही अनुकम्पा है और यही स्थिति कल भी रहेगी।

वह विरोधी पक्ष जिसने अपना सिर ऊंचा किया है और जो पहले की भांति अपने चरित्र में समान है, उसने कई कुटनीतियों को अपनाया है। उन्होंने विभिन्न प्रकार की रणनीति अपनाई है। सदन इस तथ्य से अवगत है कि गवर्नर जनरल के नाम का भी प्रयोग किया गया था और यह एक साजिश थी। केवल दो या तीन दिन पहले कलकत्ता के एक समाचार-पत्र में मैंने श्यामा प्रसाद मुकर्जी का नाम देखा है। और उसके बाद दो या तीन अन्य जाने-पहचाने विरोधियों के नाम भी देखे हैं और मैं आश्चर्य में थी कि