628 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वे तत्काल या अकस्मात नहीं होगे। विधेयक में एक ऐसी धारा है जो स्पष्ट कहती है कि इस संहिता के प्रारंभ होने की तिथि से संपूर्ण संयुक्त परिवार की अवधारणा समाप्त हो जाएगी। आप ऐसा तुरंत करने के लिए प्रयासरत हैं, अतः मेरी सोच है कि इससे निश्चित तौर पर समाज के मौलिक विचारों को ठेस पहुंचेगी, और जो समाज की एकता के लिए कई सदियों से संयुक्त परिवार का आधार रहे हैं। अतः मैं अपने जोशीले सुधारक मित्रों से अपील करता हूँ कि मैं आपके साथ हूँ, क्योंकि निःसंदेह यह पद्धति परिवर्तित की जानी चाहिए और आज इस विश्व में कोई भी इसका लम्बे समय तक प्रतिरोध नहीं कर पाएगा। पर प्रश्न यह उठता है कि क्या ऐसा हम धीरे-धीरे करेंगे, क्या हम जनता को अपने साथ रखेंगे और उतना ही चलेंगे जितना वह हमारे साथ चल सकती है? या हम उन्हें अपने साथ जबरदस्ती रखेंगे और दूसरी तरफ क्या हम मात्र कलम के जोर और विधायी प्रक्रिया से इस संयुक्त परिवार पद्धति को नष्ट कर देंगे? आज के दौर में असमान्य परिस्थितियों के कारण जनता कई ऐसी समस्याओं से चिन्तित है, पर इस प्रश्न ने भी उसे आकर्षित किया है और ऐसी किसी भी तात्कालिक कार्यवाही से ऐसे परिणाम आने की संभावना जो न ही सुधारकों के लिए, न किसी और के लिए उचित होंगे। मैं सहमत हूँ कि हम लम्बे समय तक यथावत् नहीं रह सकते हैं। अतीत में भी हिंदू समाज में विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं द्वारा विभिन्न प्रकार के परिवर्तन हुए हैं। पर हम किसी को बलात लागू करने का प्रयास करेंगे, तो मैं यकीन से कह सकता हूँ कि परिणाम बहुत अच्छे नहीं होंगे। यह परिवर्तन भी धीरे-धीरे लागू होने चाहिए।
महोदय, मुझे एक बात पर आश्चर्य है। यहाँ हम दत्तकग्रहण के संरक्षण का प्रयास कर रहे हैं। मैं नहीं जानता इसका क्या प्रयोजन है। दत्तकग्रहण हिंदू कानून के लिए विलक्षण बात है। अन्य समाजों में भी बच्चों को गोद लिया जाता है, किंतु वह परिवार को बनाए रखने के लिए उद्देश्य से नहीं होता केवल बच्चों के प्रति लगाव और उनके लालन-पोषण के लिए मानवीय इच्छापूर्ति के लिए होता है। मुझे पता चला है कि अमेरिका और इंग्लैण्ड में भी गोद लेने का रिवाज है, किंतु उनका गोद लेने का उद्देश्य अलग होता है। हिंदू कानून की मौजूदा पद्धति में दत्तकग्रहण एक विलक्षण प्रक्रिया है, क्योंकि संयुक्त परिवार की हिंदू व्यवस्था संयुक्त परिवार को जारी रखने पर आधारित होती है। इस कानून द्वारा जिस तरीके से आप संयुक्त परिवार का विखंडन कर रहे हैं, तब उसके बाद गोद लेने के प्रावधान की आवश्यकता क्या है? इसे एक अलग दृष्टिकोण से भी देखें। क्यों गोद लेना हिन्दू समाज की एक विलक्षण विशेषता रही हैं? क्योंकि संयुक्त परिवार का आधार हिंदू समाज की मुख्य विशेषता थी और इसे जारी रखने के लिए गोद लेना वांछनीय था। संयुक्त परिवार के बिखराव के और व्यक्तिवाद के आगमन के फलस्वरूप मेरा मानना है कि हम क्यों दत्तकग्रहण को संरक्षण देने में अपना समय नष्ट कर रहे हैं। मैं निश्चित रूप से दत्तकग्रहण का विरोधी हूँ। अब तो दत्तकग्रहण के 100