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मामलों में से 99 मामले अदालतों में हैं, क्योंकि संपूर्ण मानसिकता में परिवर्तन आ गया है। जब कोई विधवा एक लड़का गोद लेती है, तो वह सोचती है कि दत्तक-पुत्र उसकी संपत्ति व अन्य मामलों में निःशुल्क सहायता करेगा। पर वह लड़का सोचता है कि जो गोद ले रहा है उससे कुछ-न-कुछ तो प्राप्त होगा। इसीलिए वर्तमान में दत्तकग्रहण मात्र स्वार्थपरक प्रयोजन के लिए किया जा रहा है और जो गोद लेने की पूर्व अवधारणा थी वह विलुप्त हो रही है। इस विधेयक के प्रावधानों के लागू के होने बाद, संपूर्ण परिवार पद्धति विलुप्त हो रही है। इस विधेयक के प्रावधानों के लागू होने के बाद, संपूर्ण परिवार पद्धति विलुपत हो जाएगी और विश्व के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ भी व्यक्तिवादी समाज आ जाएगा। इसलिए अब दत्तकग्रहण का प्रावधान बनाने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। ऐसा करने से दुविधा ही होगी। यदि हम जो कुछ कर रहे हैं, वह सुसंगत और तर्कशील होना चाहिए, तो हमें गोद लेने के प्रावधान से बचना चाहिए।
मैं अब विवाह और तलाक के मुद्दों पर आता हूँ। माननीय सदस्य श्री संथानम ने एक बात प्रत्येक से पूछी थी कि वे एक विवाह-प्रथा के पक्ष में थे या उसके विरोध में थे? मैं कहूँगा कि एक विवाह-प्रथा आज के दौर में नितांत आवश्यकता है।
मैं यह नहीं सोचता हूँ कि इस सदन में कोई सदस्य इसका विरोध करेगा, किंतु क्या हिंदू संहिता विधेयक इस प्रयोजनार्थ आवश्यक है? हमने बम्बई प्रांत में देखा है कि वहाँ एक विवाह-प्रथा है और कुछ मामलों में तलाक की अनुमति भी है। इन मामलों के आगे हमने कुछ भी अतिरिक्त नहीं किया है। एक विवाह को वैधानिक करना है, तो मैं कह सकता हूँ कि इस पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती। इस संबंध में वैचारिक कारणों के अलावा व्यावहारिक आधार भी इसके पक्ष में ही है। कोई भी अब एक से अधिक पत्नी रखना भी नहीं चाहता। केवल कुछ करोड़पति या अरबपति इस विलासिता को हासित कर सकते हैं, और शेष के पास इसकी गुंजाइश ही नहीं है। माननीय श्री थनथानन ने सुझाव दिया है कि यह कोई मानसिक विलासिता नहीं है। अतः सामान्यतः किसी मानसिक विलासित की इच्छा के बिना कोई भी ऐसा नहीं करता, जबकि इसके साथ उसकी पत्नी और बच्चे हों। अस्तु, यही है कि यह एक आम धारणा है और मैं भी सोचता हूँ कि दोनो पक्ष इस पर सहमत होंगे कि एक विवाह-प्रथा अवश्य जारी रहनी चाहिए।
किंतु हमें तलाक से संबंधित मुद्दे को दिग्भ्रमित करने का प्रयास करना चाहिए। जैसे ही आप एक विवाह कराते हो, उसके बाद यदि पता चले कि उसका साथी कोढ़ी है, तो आपको तलाक की व्यवस्था करनी होगी। यदि आप नहीं करते तो आप उन्हें उनके वैवाहिक अधिकार से वंचित कर रहे हो। कुछ मामलों में तलाक एक विवाह-प्रथा का पूरक परिणाम भी होता है। प्राचीन कानूनी सलाहकार मनु ने भी ऐसे मामलों में इसका प्रावधान किया है-