हिन्दू संहिता - जारी... - Page 655

640 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस तरह संगठित हो गया है कि इस संसार में दान-पुण्य की और सामाजिक सेवा तथा उदारता के लिए भी काफी जगह है बजाय इसके, कि हम अपने पूर्वजों, जिनका अब इस संसार से कोई वास्ता नहीं है, के लिए कुछ करते रहें। अतः बेहतर यह होगा कि इस बृहत विश्व के लिए कुछ किया जाए। अब दत्तकग्रहण ऐसी संस्था है, जिसका कोई अर्थ नहीं है। इसकी वर्तमान समाज में कोई उपयोगिता भी नहीं है।

एक माननीय सदस्यः वे आपके भाषण पर आज रात चिंतन करेंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः विभागीय विधेयक में मूल विधेयक की धारा 10 को पूर्णतः हटा दिया गया है-पूर्णतः भुला दिया गया है। वास्तव में, मुस्लिम कानून की भांति हिंदू कानून में भी नामित उत्तराधिकारी, एग्नेट, कॉग्नेट और अन्य असंबद्ध उत्तराधिकारी बन जाते हैं। इनमें विचारक, आचार्य, शिष्य और साथी-ब्रह्मचारी तथा एक ही शिक्षक से शिक्षा पाने वाले सभी शिष्य उत्तराधिकारी होते हैं। लेकिन विभागीय विधेयक में आचार्य और साथी-ब्रह्मचारी के सम्मान तथा उनकी भावनाओं को पूर्णतः अनदेखा कर दिया गया है। यह भी एक गंभीर परिवर्तन है। मुझे आशा है कि मैं अंततः सफल हो जाऊँगा कि कानून मंत्री इन गंभीर परिवर्तनों के साथ-साथ कई अन्य परिवर्तनों के बारे में सहमत हो जाएंगे।

इसके बाद हम, विभागीय विधेयक की धारा 109 और अंतिम विधेयक की धारा 108 पर आते हैं। ये प्रावधान नितांत नए हैं।

इस धारा में कुछ नए उत्तराधिकारियों का परिचय दिया गया है, जिन्हें मूल बिल में शामिल नहीं किया गया था।

स्त्रीधन के उत्तराधिकार के संबंध में भी कुछ परिवर्तन किए गए हैं। इसके बाद, भाग II, उपबंध-14 में जहाँ उत्तराधिकारी साथ-साथ रहते...

(5.00 बजे सायं)

माननीय उपाध्यक्षः यदि माननीय सदस्य जल्दी समाप्त करना चाहते हैं। तो हम कुछ अतिरिक्त मिनटों के लिए रुक सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः नहीं, श्रीमान्।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः यदि माननीय सदस्य समाप्त करना चाहें, तो हम पांच मिनट ओर रुक सकते हैं।

माननीय उपाध्यक्षः अब मैं यह अध्यक्ष महोदय पर छोड़ता हूँ।

अब सदन कल प्रातः 10ः45 तक के लिए अब स्थगित की जाती है।

इसके बाद सदन शनिवार 2 अप्रैल, 1949 प्रातः 10ः45 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।