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ऽहिन्दू संहिता µ जारी...
माननीय अध्यक्षः अब प्रस्ताव पर आगे विचार हेतु सदन की कार्यवाही शुरू की जाएगी ताकि संशोधित किए जाने वाला विधेयक और हिंदू कानून कुछ खंडों के संशोधन एवं संहिताकरण पर विचार किया जा सके जिसके बारे में प्रवर समिति द्वारा रिपोर्ट लिया गया है।
श्री महावीर त्यागी (यू.पी.ः सामान्य)ः श्रीमान्, मैं जानना चाहता हूँ कि हम कब इस बिल पर चर्चा करेंगे क्योंकि कुछ सरकारी काम-काज हैं और हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस बिल पर कब तक और विचार किया जाएगा? अब, इस चरण में विधायी विलंब किया जा रहा है, और सभी सदस्य बोलने के लिए उत्सुक हैं, पर उन्हें दो या तीन दिनों से बोलने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा। अतः श्रीमान्, मैं जानना चाहता हूँ कि फिलहाल, इस बिल पर कितनी लम्बी बहस और चलेगी?
माननीय अध्यक्षः यह मेरे लिए मुश्किल है कि यह बात सकूँ कि इस बिल पर कितनी लम्बी चर्चा होगी। यह सदस्यों के ऊपर ज्यादा निर्भर करता है। मैं कह सकता हूँ शायद एक दिन अर्थात् 4 तारीख तक, मुझे लगता है कि अगले सप्ताह सभी कार्य दिवस सरकारी कार्यवाही के लिए आबंटित हैं तथा यह सरकार का मामला है कि वह कौन-सा विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहती है। और यह उसकी प्राथमिकता पर निर्भर है, जहाँ विभिन्न दृष्टिकोणों को भी ध्यान में रखा जाता है।
श्री महावीर त्यागीः श्रीमान्, मैं आपके मार्फत अनुरोध करता हूँ कि सरकार को अत्यावश्यक कार्यों को पहले लेना चाहिए और इस विधेयक-विचार अंत में किया जाए या हम पर छोड़ दिया जाए कि कौन-सा विधेयक पहले लिया जाए ताकि हम अगले विधेयकों के लिए तैयार को सकें। हम, अन्य विधयकों पर चर्चा में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेय (पं. बंगालः सामान्य)ः श्रीमान् मेरे माननीय मित्र, श्री महावीर त्यागी द्वारा मैं आप द्वारा की गई टिप्पणी की सराहना करता हूँ कि ऐसे मामलों पर सदन को निर्णय लेना चाहिए कि किसी बिल पर कितनी लम्बी बहस चले। और इससे यही आशय निकलता है कि जब भी वक्ताओं की ज्यादा संख्या हो और वे लम्बे समय तक इसे जारी रखना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं। मैं आपकी इस टिप्पणी का आशय कुछ ऐसा ही समझता हूँ। यकीनन, मुझे लगता है कि अध्यक्ष के हाथ में यह नहीं है कि कितने दिनों का आबंटन किया जाए। इस क्रम में मैं, सोचता हूँ कि अध्यक्ष
ऽसी.ए. (विधि.) डी., खंड 3, भाग II, 2 अप्रैल, 1949, पृष्ठ 2246-89